किंचित्प्रकाशस्तिमितोग्रतारै-
र्भ्रूविक्रियायां विरतप्रसङ्गैः ।
नेत्रैरविस्पन्दितपक्ष्ममालै-
र्लक्ष्यीकृतघ्राणमधोमयूखैः ॥
किंचित्प्रकाशस्तिमितोग्रतारै-
र्भ्रूविक्रियायां विरतप्रसङ्गैः ।
नेत्रैरविस्पन्दितपक्ष्ममालै-
र्लक्ष्यीकृतघ्राणमधोमयूखैः ॥
र्भ्रूविक्रियायां विरतप्रसङ्गैः ।
नेत्रैरविस्पन्दितपक्ष्ममालै-
र्लक्ष्यीकृतघ्राणमधोमयूखैः ॥
अन्वयः
AI
(सः) किंचित्-प्रकाश-स्तिमित-उग्र-तारैः, भ्रू-विक्रियायाम् विरत-प्रसङ्गैः, अविस्पन्दित-पक्ष्म-मालैः, अधः-मयूखैः, लक्ष्यीकृत-घ्राणम् नेत्रैः (आत्मानम् अवलोकयन्तम् आसीत्) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
किंचिदिति । किंचित्प्रकाशाः ईषत्प्रकाशाः स्तिमिता निश्चला उग्राश्च ताराः कनीनिका येषां तैः । `तारकाक्ष्णः कनीनिका` इत्यमरः (अमरकोशः २.६.९३ ) । भ्रूविक्रियायां भ्रूविक्षेपे विरतप्रसङ्गैः प्रसक्तिरहितैरविस्पन्दितपक्ष्ममालैरचलितपक्ष्मपङ्क्तिभिरधःप्रसृता मयूखा येषां तैरधोमयूखैर्नेत्रैः । त्रिनेत्रत्वाद्वहुवचनम् । लक्ष्यीकृतघ्राणं नासाग्रनिविष्टदृष्टिमित्यर्थः । `करणान्यबहिष्कृत्य स्थणुवन्निश्चलात्मकः । आत्मानं हृदये ध्यायेन्नासाग्रन्यस्तलोचनः ॥` इति योगसारे
Summary
AI
He was seen with eyes whose fierce pupils were steady and slightly luminous, which had ceased from the activity of knitting the brows, whose rows of eyelashes were unmoving, whose rays were directed downwards, and which were focused on the tip of the nose.
सारांश
AI
उनकी आँखें बिना पलक झपकाए नाक के अग्रभाग पर टिकी थीं। भौंहों की चंचलता से रहित और स्थिर पुतलियों वाली वे आँखें नीचे की ओर किरणें बिखेर रही थीं।
पदच्छेदः
AI
| किंचित्प्रकाशस्तिमितोग्रतारैः | किंचित्–प्रकाश–स्तिमित–उग्र–तारा (३.३) | with pupils that were fierce, steady, and slightly luminous |
| भ्रूविक्रियायां | भ्रू–विक्रिया (७.१) | in the movement of the eyebrows |
| विरतप्रसङ्गैः | विरत (वि√रम्+क्त)–प्रसङ्ग (३.३) | which had ceased from activity |
| नेत्रैः | नेत्र (३.३) | with eyes |
| अविस्पन्दितपक्ष्ममालैः | अविस्पन्दित (अ√स्पन्द्+क्त)–पक्ष्म–माला (३.३) | whose rows of eyelashes were unmoving |
| लक्ष्यीकृतघ्राणम् | लक्ष्यीकृत (√कृ+च्वि+क्त)–घ्राण (२.१) | focused on the nose (adverbially) |
| अधोमयूखैः | अधः–मयूख (३.३) | with downward rays |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | चि | त्प्र | का | श | स्ति | मि | तो | ग्र | ता | रै |
| र्भ्रू | वि | क्रि | या | यां | वि | र | त | प्र | स | ङ्गैः |
| ने | त्रै | र | वि | स्प | न्दि | त | प | क्ष्म | मा | लै |
| र्ल | क्ष्यी | कृ | त | घ्रा | ण | म | धो | म | यू | खैः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.