गीतान्तरेषु श्रमवारिलेशैः
किंचित्समुच्छ्वासितपत्रलेखम् ।
पुष्पासवाघूर्णितनेत्रशोभि
प्रियामुखं किंपुरुषश्चुचुम्बे ॥

अन्वयः AI किंपुरुषः गीत-अन्तरेषु श्रम-वारि-लेशैः किंचित् समुच्छ्वासित-पत्र-लेखम्, पुष्प-आसव-आघूर्णित-नेत्र-शोभि प्रिया-मुखम् चुचुम्बे ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) गीतान्तरेष्विति । किंपुरुषः किंनरः श्रमवारिलेशैः स्वेदोदबिन्दुभिः किंचिदीषत्समुच्छ्‌वासिता विश्लेषिताः पत्रलेखा यस्य तत् । पुष्पाणामासवो मद्यं पुष्पासवः । पुष्पोद्भवमद्यमित्यर्थः । वसन्ते मधूकस्य संभवात्पुष्पवासितमिति केचित् । तेनाघूर्णिताभ्यामुद्‌भ्रान्ताभ्यां शोभत इति तथोक्तं प्रियामुखं गीतान्तरेषु गीतमध्यंषु चुचुम्बे चुचुम्ब
Summary AI In the intervals of singing, the Kimpurusha kissed the face of his beloved, which was lovely with eyes rolling from the intoxication of flower-nectar, and on which the painted leaf-designs were slightly disturbed by droplets of perspiration.
सारांश AI गायन के बीच पसीने की बूंदों से मिटते हुए श्रृंगार वाली और पुष्प-मदिरा से मदमस्त नेत्रों वाली किन्नर स्त्रियों के मुख को उनके प्रियतमों ने प्रेमपूर्वक चूमा।
पदच्छेदः AI
गीतान्तरेषुगीतअन्तर (७.३) in the intervals of singing
श्रमवारिलेशैःश्रमवारिलेश (३.३) by droplets of perspiration
किंचित्समुच्छ्वासितपत्रलेखम्किंचित्समुच्छ्वासित (सम्+उत्√श्वस्+णिच्+क्त)–पत्रलेख (२.१) on which the painted leaf-designs were slightly disturbed
पुष्पासवाघूर्णितनेत्रशोभिपुष्पआसवआघूर्णित (आ√घूर्ण्+क्त)नेत्रशोभिन् (२.१) lovely with eyes rolling from flower-nectar
प्रियामुखम्प्रियामुख (२.१) the face of his beloved
किंपुरुषःकिंपुरुष (१.१) the Kimpurusha
चुचुम्बेचुचुम्बे (√चुम्ब् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) kissed
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
गी ता न्त रे षु श्र वा रि ले शैः
किं चि त्स मु च्छ्वा सि त्र ले खम्
पु ष्पा वा घू र्णि ने त्र शो भि
प्रि या मु खं किं पु रु श्चु चु म्बे
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