अन्वयः
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करेणुः रसात् गजाय पङ्कज-रेणु-गन्धि गण्डूष-जलम् ददौ । रथाङ्ग-नामा अर्ध-उपभुक्तेन बिसेन जायाम् संभावयामास ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
ददाविति । रसादतिरागात्करेणुः करिणी । `करेणुरिभ्यां स्त्री नेभे` इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.५९ ) । पङ्काज्जायत इति पङ्कजं तस्य रेणुः पङ्कजरेणुस्तस्य गन्धोऽस्यास्तीति पङ्कजेरणुगन्धि गण्डूषजलं मुखान्तर्धृतजलं गजाय ददौ । रथाङ्गनामा चक्रवाकोऽर्धं यथातथोपभुक्तेनार्द्धजग्धेन बिसेन जायां संभावयामास । स्वजग्धशेषं ददावित्यर्थः
Summary
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The female elephant affectionately gave a mouthful of water, fragrant with lotus pollen, to the male elephant. The Chakravaka bird honored his mate with a lotus stalk that he himself had half-eaten.
सारांश
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हथिनी ने प्रेमपूर्वक कमल के पराग की सुगंध वाला जल अपनी सूँड से हाथी को पिलाया और चक्रवाक पक्षी ने आधा खाया हुआ कमल का डंठल अपनी प्रियतमा को भेंट किया।
पदच्छेदः
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| ददौ | ददौ (√दा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | gave |
| रसात् | रस (५.१) | out of affection |
| पङ्कजरेणुगन्धि | पङ्कज–रेणु–गन्धि (२.१) | fragrant with lotus pollen |
| गजाय | गज (४.१) | to the male elephant |
| गण्डूषजलम् | गण्डूष–जल (२.१) | a mouthful of water |
| करेणुः | करेणु (१.१) | the female elephant |
| अर्धोपभुक्तेन | अर्ध–उपभुक्त (उप√भुज्+क्त, ३.१) | with the half-eaten |
| बिसेन | बिस (३.१) | lotus stalk |
| जायाम् | जाया (२.१) | his mate |
| संभावयामास | संभावयामास (सम्√भू +णिच्+आम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | honored |
| रथाङ्गनामा | रथाङ्ग–नामन् (१.१) | the Chakravaka bird |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | दौ | र | सा | त्प | ङ्क | ज | रे | णु | ग | न्धि |
| ग | जा | य | ग | ण्डू | ष | ज | लं | क | रे | णुः |
| अ | र्धो | प | भु | क्ते | न | बि | से | न | जा | यां |
| सं | भा | व | या | मा | स | र | था | ङ्ग | ना | मा |
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