असूत सद्यः कुसुमान्यशोकः
स्कन्धात्प्रभृत्येव सपल्लवानि ।
पादेन नापैक्षत सुन्दरीणां
संपर्कमासिञ्जितनूपुरेण ॥
असूत सद्यः कुसुमान्यशोकः
स्कन्धात्प्रभृत्येव सपल्लवानि ।
पादेन नापैक्षत सुन्दरीणां
संपर्कमासिञ्जितनूपुरेण ॥
स्कन्धात्प्रभृत्येव सपल्लवानि ।
पादेन नापैक्षत सुन्दरीणां
संपर्कमासिञ्जितनूपुरेण ॥
अन्वयः
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अशोकः स्कन्धात् प्रभृति एव स-पल्लवानि कुसुमानि सद्यः असूत । सः आसिञ्जित-नूपुरेण सुन्दरीणाम् पादेन संपर्कम् न अपैक्षत ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
असूतेति ॥ अशोको वृक्षविशेषः सद्यः स्कन्धात्प्रकाण्डात्प्रभृत्येव स्कन्धादारभ्येत्यर्थः । भाष्यकारवचनात्प्रभृतियोगे पञ्चमीति कैयटः । भाष्यं च `मूलात्प्रभृत्यग्राद्वृक्षांस्तक्ष्णुवन्ति` इति `कार्तिक्याः प्रभृत्याग्रहायणी मास` इत्यादि । सपल्लवानि कुसुमान्यसूत । उभयमप्यजीजनदित्यर्थः । आसिञ्जितो नूपुरो यस्य तेन । सिञ्जधातोः `अकर्मक--` इत्यादिना कर्तरि क्तः । सुन्दरीणां पादेन संपर्कं ताडनं नापैक्षत । `सनूपुररवेण स्त्रीचरणेनाभिताडनम् । दोहदं यदशोकस्य ततः पुष्पोद्गमो भवेत् ॥` इति । तथाहि- `पादाहतः प्रमदया विकसत्यशोकः शोकं जहाति बकुलो मुखसीधुसिक्तः । आलोकितः कुरुबकः कुरुते विकासमालोडितस्तिलक उत्कलिको विभाति` इति
Summary
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The Ashoka tree immediately produced flowers, complete with new leaves, right from its trunk. It did not wait for the customary touch of a beautiful woman's foot, adorned with tinkling anklets, to blossom.
सारांश
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अशोक के वृक्ष ने सुंदरियों के नूपुरों वाले चरणों के प्रहार की प्रतीक्षा किए बिना ही, जड़ से लेकर शाखाओं तक तुरंत कोमल पत्तों और फूलों को धारण कर लिया।
पदच्छेदः
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| असूत | असूत (√सू कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | produced |
| सद्यः | सद्यः | immediately |
| कुसुमानि | कुसुम (२.३) | flowers |
| अशोकः | अशोक (१.१) | the Ashoka tree |
| स्कन्धात् | स्कन्ध (५.१) | from the trunk |
| प्रभृति | प्रभृति | right from |
| एव | एव | itself |
| सपल्लवानि | स–पल्लव (२.३) | with new leaves |
| पादेन | पाद (३.१) | by the foot |
| न | न | not |
| अपैक्षत | अपैक्षत (अप√ईक्ष् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | did wait for |
| सुन्दरीणाम् | सुन्दरी (६.३) | of beautiful women |
| संपर्कम् | संपर्क (सम्√पृच्+घञ्, २.१) | the contact |
| आसिञ्जितनूपुरेण | आसिञ्जित (आ√सिञ्ज्+क्त)–नूपुर (३.१) | with tinkling anklets |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सू | त | स | द्यः | कु | सु | मा | न्य | शो | कः |
| स्क | न्धा | त्प्र | भृ | त्ये | व | स | प | ल्ल | वा | नि |
| पा | दे | न | ना | पै | क्ष | त | सु | न्द | री | णां |
| सं | प | र्क | मा | सि | ञ्जि | त | नू | पु | रे | ण |
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