अथोरुदेशादवतार्य पाद-
माक्रान्तिसंभावितपादपीठम् ।
संकल्पिथार्थे विवृतात्मशक्ति-
माखण्डलः काममिदं बभाषे ॥

अन्वयः AI अथ आखण्डलः उरुदेशात् आक्रान्तिसंभावितपादपीठम् पादम् अवतार्य, संकल्पितार्थे विवृतात्मशक्तिम् कामम् इदम् बभाषे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) अथेति ॥ अथ स्मरवाक्यश्रवणानन्तरमाखण्डलः सहस्त्राक्ष ऊरुदेशात्पादमाक्रमणेन संभावितं पादपीठं यस्मिंस्तद्यथा तथावतार्थं संकल्पितार्थे हरचित्ताकर्षणरूपे विषये विवृतात्मशक्तिम् । `कुर्यां हरस्यापि-` (३/१०) इत्यादिना प्रकटीकृतस्वसामर्थ्यं कामं स्मरमिदं वक्ष्यमाणं बभाषे
Summary AI Then Indra, lowering from his thigh his foot that was accustomed to a footstool, spoke these words to Kama, who had revealed his power regarding the intended task.
सारांश AI तब इंद्र ने अपने पैर को पादपीठ से नीचे उतारा और कामदेव की आत्मशक्ति को देखकर अपने संकल्पित कार्य के विषय में इस प्रकार कहना शुरू किया।
पदच्छेदः AI
अथअथ then
उरुदेशात्उरुदेश (५.१) from his thigh
अवतार्यअवतार्य (अव√तृ+ल्यप्) having lowered
पादम्पाद (२.१) his foot
आक्रान्तिसंभावितपादपीठम्आक्रान्ति–संभावितपादपीठ (२.१) which was honored by resting on the footstool
संकल्पितार्थेसंकल्पितअर्थ (७.१) in the intended matter
विवृतात्मशक्तिम्विवृतआत्मशक्ति (२.१) to him who had revealed his own power
आखण्डलःआखण्डल (१.१) Indra
कामम्काम (२.१) to Kama
इदम्इदम् (२.१) this
बभाषेबभाषे (√भाष् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) spoke
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
थो रु दे शा ता र्य पा
मा क्रा न्ति सं भा वि पा पी ठम्
सं ल्पि था र्थे वि वृ ता त्म क्ति
मा ण्ड लः का मि दं भा षे
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