अन्वयः
AI
वः अयं कामः संपत्स्यते। कश्चित् कालः प्रतीक्ष्यताम्। तु अस्य सिद्धौ आत्मना सर्गव्यापारं न यास्यामि।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
संपत्स्यत इति ॥ अयं वो युष्माकं कामो मनोरथः सेनानीरुपः संपत्स्यते सेत्स्यति । कश्चित्कियानपि कालः प्रतीक्ष्यताम् । तु किंतु तस्य सेनान्यः सिद्धौ विषय आत्मना स्वयं सर्गः सृष्टिरेव व्यापारस्तं न यास्यामि । नाहं स्रक्ष्यामीत्यर्थः
Summary
AI
Brahma said: "This desire of yours will be fulfilled. Wait for some time. However, for its accomplishment, I will not personally undertake the act of creation."
सारांश
AI
तुम्हारी इच्छा अवश्य पूर्ण होगी, बस कुछ समय प्रतीक्षा करो। किंतु मैं स्वयं उसके विनाश की रचना नहीं करूँगा।
पदच्छेदः
AI
| संपत्स्यते | संपत्स्यते (सम्√पद् कर्तरि लृट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | will be fulfilled. |
| वः | युष्मद् (६.३) | Your |
| कामः | काम (१.१) | desire |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| कालः | काल (१.१) | time |
| कश्चित् | कश्चित् (१.१) | Some |
| प्रतीक्ष्यताम् | प्रतीक्ष्यताम् (प्रति√ईक्ष् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | should be awaited. |
| न | न | not |
| तु | तु | However, |
| अस्य | इदम् (६.१) | its |
| सिद्धौ | सिद्धि (७.१) | in the accomplishment of, |
| यास्यामि | यास्यामि (√या कर्तरि लृट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I will undertake |
| सर्गव्यापारम् | सर्ग–व्यापार (२.१) | the act of creation |
| आत्मना | आत्मन् (३.१) | personally. |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | प | त्स्य | ते | वः | का | मो | यं |
| का | लः | क | श्चि | त्प्र | ती | क्ष्य | ताम् |
| न | त्व | स्य | सि | द्धौ | या | स्या | मि |
| स | र्ग | व्या | पा | र | मा | त्म | ना |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.