अन्वयः
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इत्थम् आराध्यमानः अपि (सः) भुवनत्रयम् क्लिश्नाति। दुर्जनः प्रत्यपकारेण शाम्येत्, उपकारेण न।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इत्थमिति । इत्थमुक्तप्रकारेण रविशशिपवनोदधिभुजंगसुरेन्द्रैराराध्यमानोऽपि भुवनत्रयं क्लिश्नाति पीडयति । तथाहि । दुर्जनः प्रत्यपकारेण प्रतीकारेणैव शाम्येच्छान्तो भवेत् । उपकारेण तु न शाम्येत् । प्रत्युत प्रकुप्यतीति भावः
Summary
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Though worshipped in this manner, he torments the three worlds. An evil person is pacified by retaliation, not by kindness.
सारांश
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इस प्रकार सेवा किए जाने पर भी वह तीनों लोकों को सताता है। दुर्जन उपकार से नहीं बल्कि प्रतिघात से ही शान्त होता है।
पदच्छेदः
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| इत्थम् | इत्थम् | Thus |
| आराध्यमानः | आराध्यमान (आ√राध्+णिच्+शानच्, १.१) | being worshipped, |
| अपि | अपि | even |
| क्लिश्नाति | क्लिश्नाति (√क्लिश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | torments |
| भुवनत्रयम् | भुवन–त्रय (२.१) | the three worlds. |
| शाम्येत् | शाम्येत् (√शम् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is pacified |
| प्रत्यपकारेण | प्रति-अपकार (३.१) | by injury in return, |
| न | न | not |
| उपकारेण | उपकार (३.१) | by kindness |
| दुर्जनः | दुर्जन (१.१) | an evil person. |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | त्थ | मा | रा | ध्य | मा | नो | ऽपि |
| क्लि | श्ना | ति | भु | व | न | त्र | यम् |
| शा | म्ये | त्प्र | त्य | प | का | रे | ण |
| नो | प | का | रे | ण | दु | र्ज | नः |
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