अन्वयः
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मरुताम् पर्याकुलत्वात् वेग-भङ्गः, अम्भसाम् प्रतीप-गमनात् इव ओघ-संरोधः, अनुमीयते ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
पर्याकुलेति ॥ मरुतां वायूनाम् । सप्तसप्तानामिति शेषः । पर्याकुलत्वात्स्खलितगतित्वाद्धेतोर्वेगस्य भङ्गोऽम्भसां जलानां प्रतीपगमनात् । उत्तानावरोहादित्यर्थः । ओघस्य संरोधः प्रवाहप्रतिबन्ध इवानुमीयते
Summary
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"From the agitation of the Maruts, a breaking of their speed is inferred. It is as if the checking of a water current is inferred from its backward flow." Brahma deduces that the wind-gods are also in disarray and have lost their power.
सारांश
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मरुद्गणों की व्याकुलता से उनके वेग का रुकना वैसे ही ज्ञात हो रहा है जैसे प्रवाह के अवरुद्ध होने से जल की विपरीत गति।
पदच्छेदः
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| पर्याकुलत्वात् | पर्याकुल (परि+आ√कुल्)–त्व (५.१) | from the agitation |
| मरुताम् | मरुत् (६.३) | of the Maruts (wind-gods) |
| वेगभङ्गः | वेग–भङ्ग (१.१) | the breaking of speed |
| अनुमीयते | अनुमीयते (अनु√मा भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is inferred |
| अम्भसाम् | अम्भस् (६.३) | of the waters |
| ओघसंरोधः | ओघ–संरोध (सम्√रुध्, १.१) | the checking of the current |
| प्रतीपगमनात् | प्रतीप–गमन (५.१) | from the backward movement |
| इव | इव | as if |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र्या | कु | ल | त्वा | न्म | रु | तां |
| वे | ग | भ | ङ्गो | ऽनु | मी | य | ते |
| अ | म्भ | सा | मो | घ | सं | रो | धः |
| प्र | ती | प | ग | म | ना | दि | व |
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