अन्वयः
AI
यमः अपि अस्तमित-त्विषा दण्डेन भूमिम् विलिखन्, अमोघे अस्मिन् (दण्डे) अपि निर्वाण-अनल-अत-लाघवम् कुरुते ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
यम इति ॥ अस्तं नाशमिताः प्राप्ताः । अस्तमिति मकारान्तमव्ययम् । तस्य `द्वीतीयाश्रितातीतपतितगतात्यस्तप्राप्तापन्नैः` इति समासः । अस्तमितास्त्विषो यस्य तेन निस्तेजस्केन दण्डेन यमोऽपि भूमिं विलिखन्नमोघेऽपि प्रागिति भावः । अस्मिन्दण्डे निर्वाणालातस्य शान्तोल्मुकस्य । अलातं नाम भूलेखनशलाका तस्य यल्लाघवं क्लैब्यं तत्कुरुते । `अलातमुल्मुकं ज्ञेयम्` इति हलायुधः । निर्वाणोऽवाते` इति निपातनान्निष्ठानत्वम् । अत्रापि लाघवमिव लाघवमिति कल्पनान्निदर्शनालंकारः
Summary
AI
"Yama, too, scratching the ground with his staff whose splendor has vanished, attributes to this once-infallible weapon the insignificance of an extinguished firebrand." Brahma observes that even Yama and his powerful staff are rendered useless.
सारांश
AI
यमराज भी अपनी कान्ति खो चुके दण्ड से भूमि कुरेद रहे हैं, जिससे वह अमोघ दण्ड अब बुझे हुए अंगारे की भाँति निस्तेज प्रतीत हो रहा है।
पदच्छेदः
AI
| यमः | यम (१.१) | Yama |
| अपि | अपि | also |
| विलिखन् | विलिखत् (वि√लिख्+शतृ, १.१) | scratching |
| भूमिम् | भूमि (२.१) | the ground |
| दण्डेन | दण्ड (३.१) | with his staff |
| अस्तमितत्विषा | अस्तमित (अस्तम्√इ+क्त)–त्विष् (३.१) | whose splendor has vanished |
| कुरुते | कुरुते (√कृ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | makes/attributes |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | to this |
| अमोघे | अमोघ (७.१) | infallible |
| अपि | अपि | even |
| निर्वाणालातलाघवम् | निर्वाण–अनल–अत–लाघव (२.१) | the insignificance of an extinguished firebrand |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | मो | ऽपि | वि | लि | ख | न्भू | मिं |
| द | ण्डे | ना | स्त | मि | त | त्वि | षा |
| कु | रु | ते | ऽस्मि | न्न | मो | घे | ऽपि |
| नि | र्वा | णा | ला | त | ला | घ | वम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.