अन्वयः
AI
तस्मिन् काले तारकेण विप्रकृताः दिवौकसः तुरासाहम् पुरोधाय स्वायंभुवम् धाम ययुः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तस्मिन्निति ॥ तस्मिन्काले पार्वतीशुश्रूषाकाले तारकेण तारकनाम्ना वज्रणखपुत्रेण केनचिदसुरेण विप्रकृता उपप्लुता दिवमोकः स्थानं येषां ते दिवौकसो देवाः । `दिवं स्वर्गेऽन्तरिक्षे च` इति विश्वः । द्यौरोक इति पक्षे पृषोदरादित्वात्साधुः । तुरं त्वरितं साहयत्यभिभवतीति तुराषाट् । साहयतेश्चौरादिकात्क्विप् । `नहिवृतिवृषि-` इत्यादिना पूर्वपदस्य दीर्धः । प्रकृतिग्रहणे प्रातिपदिकस्यापि ग्रहणात् । मुग्धबोधकारस्तु तुराशब्दष्टावन्त इत्याचष्टे । तं तुरासाहं देवेन्द्रम् । अजादिषु साङ्रूपत्वाभावात् । `सहेः साढः सः` इति षत्वं न भवति । पुरोधाय पुरस्कृत्य । स्वयंभुवो ब्रह्मण इदं स्वायंभुवम् । संज्ञापूर्वकविधेरनित्यत्वात् ओर्गुणः` इति गुणो न । धाम स्थानं ययुः । ब्रह्मलोकं जग्मुरित्यर्थः
Summary
AI
At that time, the gods, being oppressed by the demon Taraka, placed Indra at their head and went to the abode of the self-born one, Brahma.
सारांश
AI
उस समय तारकासुर द्वारा प्रताड़ित देवता इन्द्र को आगे करके ब्रह्मा के स्वयंभू नामक धाम में पहुँचे।
पदच्छेदः
AI
| तस्मिन् | तद् (७.१) | At that |
| विप्रकृताः | विप्रकृत (वि+प्र√कृ+क्त, १.३) | oppressed |
| काले | काल (७.१) | time |
| तारकेण | तारक (३.१) | by Taraka |
| दिवौकसः | दिव्–ओकस् (१.३) | the gods |
| तुरासाहम् | तुरासाह् (२.१) | Indra |
| पुरोधाय | पुरोधाय (पुरस्√धा+ल्यप्) | placing in front |
| धाम | धामन् (२.१) | abode |
| स्वायंभुवम् | स्वायंभुव (२.१) | of Brahma |
| ययुः | ययुः (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | went |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | न्वि | प्र | कृ | ताः | का | ले |
| ता | र | के | ण | दि | वौ | क | सः |
| तु | रा | सा | हं | पु | रो | धा | य |
| धा | म | स्वा | यं | भु | वं | य | युः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.