अवचितबलिपुष्पा वेदिसंमार्गदक्षा
नियमविधिजलानां बर्हिषां चोपनेत्री ।
गिरिशमुपचचार प्रत्यहं सा सुकेशी
नियमितपरिखेदा तच्छिरश्चन्द्रपादैः ॥
अवचितबलिपुष्पा वेदिसंमार्गदक्षा
नियमविधिजलानां बर्हिषां चोपनेत्री ।
गिरिशमुपचचार प्रत्यहं सा सुकेशी
नियमितपरिखेदा तच्छिरश्चन्द्रपादैः ॥
नियमविधिजलानां बर्हिषां चोपनेत्री ।
गिरिशमुपचचार प्रत्यहं सा सुकेशी
नियमितपरिखेदा तच्छिरश्चन्द्रपादैः ॥
अन्वयः
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अवचितबलिपुष्पा, वेदीसंमार्गदक्षा, नियमविधिजलानाम् बर्हिषाम् च उपनेत्री, तच्छिरश्चन्द्रपादैः नियमितपरिखेदा सती सा सुकेशी प्रत्यहम् गिरिशम् उपचचार।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अवचितेति । सुकेशी शोभनमूर्धजा । `स्वाङ्गाच्चोपसर्जनादसंयोगोपधात्` (अष्टाध्यायी ४.१.५४ ) इति ङीष् । सा पार्वत्यवचितानि लूनानि बलिपुष्पाणि पूजाकुसुमानि यथा सा वेदेर्नियमवेदिकायाः संमार्गे संमार्जने दक्षा नियमविधेर्नित्यकर्मानुष्ठानस्य यानि जलानि तेषां बर्हिषां कुशानां चोपेनेत्र्यानेत्री सती तस्य गिरिशस्य शिरसि चन्द्रस्य पादै रश्मिभिः । `पादा रश्म्यङ्घ्रितुर्यांशाः` इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.९७ ) । नियमितपरिखेदा निवर्तितपरिश्रमा सत्यहन्यहनि प्रत्यहम् । `अव्ययं विभक्तिसमीपसमृद्धी-` त्यादिना नियतार्थेऽव्ययीभावः नपुंसकादन्यतरस्याम् इत्यच्प्रत्ययः । गिरिशमुपचचार शुश्रूषांचक्रे
Summary
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That lady of beautiful hair, Parvati, served Shiva daily. She gathered flowers for offerings, was skilled in cleaning the altar, and brought water and Kusha grass for the rites. Her fatigue from these duties was alleviated by the cool rays of the crescent moon on Shiva's head.
सारांश
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पार्वती प्रतिदिन पूजा सामग्री जुटाकर और वेदी की स्वच्छता कर शिव की सेवा करने लगीं। महादेव के मस्तक स्थित चन्द्रमा की किरणें उनकी थकान हर लेती थीं।
पदच्छेदः
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| अवचितबलिपुष्पा | अवचित (अव√चि+क्त)–बलि–पुष्प (१.१) | she who gathered flowers for offerings |
| वेदिसंमार्गदक्षा | वेदि–संमार्ग–दक्ष (१.१) | skilled in cleansing the sacrificial altar |
| नियमविधिजलानाम् | नियम–विधि–जल (६.३) | of waters for prescribed rites |
| बर्हिषाम् | बर्हिस् (६.३) | of Kusha grass |
| च | च | and |
| उपनेत्री | उपनेत्री (उप√नी+तृच्, १.१) | the bringer |
| गिरिशम् | गिरिश (२.१) | Shiva |
| उपचचार | उपचचार (उप√चर् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attended upon |
| प्रत्यहम् | प्रत्यहम् | every day |
| सा | तद् (१.१) | she |
| सुकेशी | सु–केश (१.१) | the one with beautiful hair |
| नियमितपरिखेदा | नियमित (नि√यम्+क्त)–परिखेद (१.१) | whose fatigue was alleviated |
| तच्छिरश्चन्द्रपादैः | तत्–शिरस्–चन्द्र–पाद (३.३) | by the rays of the moon on his head |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | व | चि | त | ब | लि | पु | ष्पा | वे | दि | सं | मा | र्ग | द | क्षा |
| नि | य | म | वि | धि | ज | ला | नां | ब | र्हि | षां | चो | प | ने | त्री |
| गि | रि | श | मु | प | च | चा | र | प्र | त्य | हं | सा | सु | के | शी |
| नि | य | मि | त | प | रि | खे | दा | त | च्छि | र | श्च | न्द्र | पा | दैः |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
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