स कृत्तिवासास्तपसे यतात्मा
गङ्गाप्रवाहोक्षितदेवदारु ।
प्रस्थं हिमाद्रेर्मृगनाभिगन्धि
किं चित्क्वणत्किंनरमध्युवास ॥
स कृत्तिवासास्तपसे यतात्मा
गङ्गाप्रवाहोक्षितदेवदारु ।
प्रस्थं हिमाद्रेर्मृगनाभिगन्धि
किं चित्क्वणत्किंनरमध्युवास ॥
गङ्गाप्रवाहोक्षितदेवदारु ।
प्रस्थं हिमाद्रेर्मृगनाभिगन्धि
किं चित्क्वणत्किंनरमध्युवास ॥
अन्वयः
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सः कृत्तिवासाः यतात्मा सन् तपसे, गङ्गाप्रवाहोक्षितदेवदारु, मृगनाभिगन्धि, किञ्चित् क्वणत्किंनरम् हिमाद्रेः प्रस्थम् अध्युवास।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
स इति । कृ त्तिवासाश्चर्माम्बरः । `अजिनं चर्म कृत्तिः स्त्री` इत्यमरः (अमरकोशः २.७.५० ) । यतात्मा नियतचित्तः सः पशुपतिस्तपसे तपोर्थं गङ्गाप्रवाहेणोक्षिताः सिक्ता देवदारवो यस्मिंस्तत्तथोक्तम् । मृगनाभिगन्धि कस्तूरीगन्धवत् । कस्तूरीमृगसंचारादिति भावः । `मृगनाभिर्मृगमदः कस्तूरी चाथ कोलकम्` इत्यमरः (अमरकोशः २.७.५० ) । क्बणन्तो गायन्तः किंन्नरा यस्मिंस्तत्तथोक्तम् । किंचित्किमपि हिमाद्रेः प्रस्थं सानुमध्युवास । कुत्रचित्प्रस्थ उवासेत्यर्थः । `उपान्वध्याङ्वसः` (अष्टाध्यायी १.४.४८ ) इत्याधारस्य कर्मत्वम् । प्रस्थोऽस्त्री सानुमानयोः ईत्यमरः
Summary
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That self-controlled Lord, clad in animal hide, took up residence for performing austerities on a plateau of the Himalayas. This place had its deodar trees sprinkled by the waters of the Ganga, was fragrant with musk, and was filled with the soft singing of Kinnaras.
सारांश
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व्याघ्रचर्मधारी संयमी शिव हिमालय के उस उन्नत शिखर पर तपस्या करने लगे जहाँ गंगा प्रवाहित होती थी और वातावरण कस्तूरी की गंध एवं किन्नरों के स्वर से गुंजायमान था।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | He |
| कृत्तिवासाः | कृत्ति–वासस् (१.१) | clad in animal hide |
| तपसे | तपस् (४.१) | for austerity |
| यतात्मा | यत–आत्मन् (१.१) | self-controlled |
| गङ्गाप्रवाहोक्षितदेवदारु | गङ्गा–प्रवाह–उक्षित–देवदारु (२.१) | having deodar trees sprinkled by the flow of the Ganga |
| प्रस्थम् | प्रस्थ (२.१) | a plateau |
| हिमाद्रेः | हिम–अद्रि (६.१) | of the Himalaya mountain |
| मृगनाभिगन्धि | मृगनाभि–गन्धि (२.१) | fragrant with musk |
| किञ्चित् | किञ्चित् | somewhat |
| क्वणत्किंनरम् | क्वणत् (√क्वण्+शतृ)–किंनर (२.१) | with softly singing Kinnaras |
| अध्युवास | अध्युवास (अधि√वस् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | dwelt in |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | कृ | त्ति | वा | सा | स्त | प | से | य | ता | त्मा |
| ग | ङ्गा | प्र | वा | हो | क्षि | त | दे | व | दा | रु |
| प्र | स्थं | हि | मा | द्रे | र्मृ | ग | ना | भि | ग | न्धि |
| किं | चि | त्क्व | ण | त्किं | न | र | म | ध्यु | वा | स |
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