पुष्पं प्रवालोपहितं यदि स्या-
न्मुक्ताफलं वा स्फुटविद्रुमस्थम् ।
ततोऽनुकुर्याद्विशदस्य तस्या-
स्ताम्रौष्ठपर्यस्तरुचः स्मितस्य ॥
पुष्पं प्रवालोपहितं यदि स्या-
न्मुक्ताफलं वा स्फुटविद्रुमस्थम् ।
ततोऽनुकुर्याद्विशदस्य तस्या-
स्ताम्रौष्ठपर्यस्तरुचः स्मितस्य ॥
न्मुक्ताफलं वा स्फुटविद्रुमस्थम् ।
ततोऽनुकुर्याद्विशदस्य तस्या-
स्ताम्रौष्ठपर्यस्तरुचः स्मितस्य ॥
अन्वयः
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यदि पुष्पम् प्रवालोपहितं स्यात्, वा मुक्ताफलं स्फुटविद्रुमस्थं (स्यात्), ततः तस्याः ताम्रौष्ठपर्यस्तरुचः विशदस्य स्मितस्य अनुकुर्यात्।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
पुष्पमिति ॥ पुष्पं पुणडरीकादिकं प्रवाले बालपल्लव उपहितं निहितं स्याद्यदि । `प्रवालो वल्लकीदण्डे विद्रुमे बालपल्लवे` इति विश्वः । मुक्ताफलं वा स्फुटे निर्मले वा विद्रुमे तिष्ठतीति स्फुटविद्रुमस्थं स्यद्यदि ततस्तर्हि विशदस्य शुभ्रस्य ताम्रे अरुणे ओष्ठे पर्यस्ता प्रसृता रुक्कान्तिर्यस्य तथोक्तस्य तस्याः पार्वत्याः स्मितस्यानुकुर्यात् । स्मितमनुकुर्यादित्यर्थः । अत्र `माषाणामश्नीयात्` इति वत्सम्बन्धमात्रविवक्षया षष्ठी । अत्र पुष्पप्रवालयोर्मुक्ताविद्रुमयोश्चासंबन्धेऽपि संबन्धोक्त्यातिशयोक्तिः । `सा च संभावना` इत्यलंकारसर्वस्वकारः । विशेषस्तु पुष्पमुक्ताफलयोरुपमानयोः प्रकृतोत्कर्षार्थमुपमेयताकल्पनात्प्रतीपालंकारः । तदुक्तम्-- `उपमानस्याक्षेप उपमेयताकल्पनं वा प्रतीपः` इति लक्षणात् । स च पूर्वोक्तातिशयोक्त्यनुप्राणित इति
Summary
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If a white flower were placed on a red coral shoot, or a pearl were set on bright red coral, then it might imitate her radiant smile, whose brilliance was cast upon her copper-red lips.
सारांश
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मूँगे पर स्थित पुष्प अथवा लाल विद्रुम में जड़े मोती ही उनके लाल ओष्ठों पर सुशोभित धवल मुस्कान की समता कर सकते हैं।
पदच्छेदः
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| पुष्पं | पुष्प (१.१) | A flower |
| प्रवालोपहितं | प्रवाल–उपहित (उप√धा+क्त, १.१) | placed on a coral shoot |
| यदि | यदि | if |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it were |
| मुक्ताफलं | मुक्ता–फल (१.१) | a pearl |
| वा | वा | or |
| स्फुटविद्रुमस्थम् | स्फुट–विद्रुम–स्थ (√स्था+क, १.१) | set on bright coral |
| ततोऽनुकुर्याद् | ततस्–अनुकुर्यात् (अनु√कृ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | then it might imitate |
| विशदस्य | विशद (६.१) | of the radiant |
| तस्याः | तद् (६.१) | her |
| ताम्रौष्ठपर्यस्तरुचः | ताम्र–ओष्ठ–पर्यस्त (परि√अस्+क्त)–रुच् (६.१) | of that whose brilliance was cast upon her copper-red lips |
| स्मितस्य | स्मित (६.१) | of the smile |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पु | ष्पं | प्र | वा | लो | प | हि | तं | य | दि | स्या |
| न्मु | क्ता | फ | लं | वा | स्फु | ट | वि | द्रु | म | स्थम् |
| त | तो | ऽनु | कु | र्या | द्वि | श | द | स्य | त | स्या |
| स्ता | म्रौ | ष्ठ | प | र्य | स्त | रु | चः | स्मि | त | स्य |
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