महीभृतः पुत्रवतोऽपि दृष्टि-
स्तस्मिन्नपत्ये न जगाम तृप्तिम् ।
अनन्तपुष्पस्य मधोर्हि चूते
द्विरेफमाला सविशेषसङ्गा ॥
महीभृतः पुत्रवतोऽपि दृष्टि-
स्तस्मिन्नपत्ये न जगाम तृप्तिम् ।
अनन्तपुष्पस्य मधोर्हि चूते
द्विरेफमाला सविशेषसङ्गा ॥
स्तस्मिन्नपत्ये न जगाम तृप्तिम् ।
अनन्तपुष्पस्य मधोर्हि चूते
द्विरेफमाला सविशेषसङ्गा ॥
अन्वयः
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पुत्रवतः अपि महीभृतः दृष्टिः तस्मिन् अपत्ये तृप्तिं न जगाम। हि अनन्तपुष्पस्य मधोः (सकाशात्) चूते द्विरेफमाला सविशेषसङ्गा (भवति)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
महीभृत इति । पुत्राश्च दुहितरश्च पुत्राः । `भ्रातृपुत्रौ स्वसृदुहितृभ्याम्` (अष्टाध्यायी १.२.६८ ) इत्येकशेषः । तेऽस्य सन्तीति पुत्रवान् । भूमार्थे मतुप् । तस्य पुत्रवतोऽपि । बह्वपत्यस्यापीत्यर्थः । महीभृतो हिमाद्रेर्दृष्टिश्चक्षुस्तस्मिन्नपत्ये तोके `अपत्यं तोकं तयोः समे` इत्यमरः (अमरकोशः २.६.२८ ) । तस्यां पार्वत्यामित्यर्थः । तृप्तिं न जगाम । तथा हि अनन्तपुष्यस्य नानाविधकुसुमस्यापि मधोर्वसन्तस्य संबन्धिनी द्विरेफमाला भृङ्गपङ्क्तिश्चूतस्य विकारे चूते चूतकुसुमे । `अवयवे च प्राण्योषधिवृक्षेभ्यः` (अष्टाध्यायी ४.३.१३५ ) इति विकारार्थोत्पन्नस्याण्प्रत्ययस्य लुक्प्रकरणे `पुष्पमूलेषु बहुलम्` इति पठनाल्लुक् । सविशेषः सातिशयः सङ्गो यस्याः सा तथोक्ता । अत्यन्तासक्तेत्यर्थः
Summary
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Even though the mountain king (Himālaya) had sons, his gaze never found satisfaction in any child but her. Indeed, though the spring season has countless flowers, the swarm of bees is especially attached to the mango blossom.
सारांश
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पुत्रों के होने पर भी पर्वतराज की दृष्टि उस कन्या पर पड़कर तृप्त नहीं होती थी, क्योंकि वसंत ऋतु में अनगिनत फूलों के होने पर भी भौरों का विशेष प्रेम आम की मंजरी पर ही होता है।
पदच्छेदः
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| महीभृतः | महीभृत् (६.१) | Of the mountain king (Himālaya) |
| पुत्रवतोऽपि | पुत्रवत् (६.१)–अपि | even though having sons |
| दृष्टिः | दृष्टि (१.१) | the gaze |
| तस्मिन्नपत्ये | तद् (७.१)–अपत्य (७.१) | on that child |
| न | न | not |
| जगाम | जगाम (√गम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attained |
| तृप्तिम् | तृप्ति (२.१) | satisfaction |
| अनन्तपुष्पस्य | अनन्त–पुष्प (६.१) | of the one with endless flowers |
| मधोर्हि | मधु (६.१)–हि | of the spring season, indeed |
| चूते | चूत (७.१) | on the mango blossom |
| द्विरेफमाला | द्विरेफ–माला (१.१) | a swarm of bees |
| सविशेषसङ्गा | सविशेष–सङ्ग (१.१) | is especially attached |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ही | भृ | तः | पु | त्र | व | तो | ऽपि | दृ | ष्टि |
| स्त | स्मि | न्न | प | त्ये | न | ज | गा | म | तृ | प्तिम् |
| अ | न | न्त | पु | ष्प | स्य | म | धो | र्हि | चू | ते |
| द्वि | रे | फ | मा | ला | स | वि | शे | ष | स | ङ्गा |
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