तया दुहित्रा सुतरां सवित्री
स्फुरत्प्रभामण्डलया चकासे ।
विदूरभूमिर्नवमेघशब्दा-
दुद्भिन्नया रत्नशलाकयेव ॥
तया दुहित्रा सुतरां सवित्री
स्फुरत्प्रभामण्डलया चकासे ।
विदूरभूमिर्नवमेघशब्दा-
दुद्भिन्नया रत्नशलाकयेव ॥
स्फुरत्प्रभामण्डलया चकासे ।
विदूरभूमिर्नवमेघशब्दा-
दुद्भिन्नया रत्नशलाकयेव ॥
अन्वयः
AI
स्फुरत्प्रभामण्डलया तया दुहित्रा सवित्री सुतराम् चकासे, नवमेघशब्दात् उद्भिन्नया रत्नशलाकया विदूरभूमिः इव।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तयेति ॥ स्फुरत्प्रभामण्डलया तया दुहित्रा सवित्री जनयित्री । `स्वरतिसूतिसूयतिधूञूदितो वा` (अष्टाध्यायी ७.२.४४ ) इतीडागमः । विदूरस्याद्रेः प्रान्तभूमिर्विदूरभूमिः । `अवदूरं विदूरस्य गिरेरुत्तुङ्गरोधसः । काकतालीयसीमान्ते मणीनामाकरो भवेत् ॥` इति बुद्धः । नवमेघशब्दादुद्भिन्नया रत्नशलाकया रत्नाङ्कुरेव सुतरां चकासे रराज
Summary
AI
The mother (Menā) shone even more brightly because of that daughter (Pārvatī) with her radiant halo, just as the land of Vidūra gems shines when a vein of jewels is revealed by the sound of a new cloud's thunder.
सारांश
AI
अपनी तेजोमयी पुत्री के कारण माता मेना वैसे ही सुशोभित हुईं, जैसे बादलों के गर्जन से अंकुरित हुई रत्न-शलाकाओं के कारण विदूर देश की भूमि चमक उठती है।
पदच्छेदः
AI
| तया | तद् (३.१) | by that |
| दुहित्रा | दुहितृ (३.१) | daughter |
| सुतराम् | सुतराम् | exceedingly |
| सवित्री | सवितृ (१.१) | the mother (Menā) |
| स्फुरत्प्रभामण्डलया | स्फुरत् (√स्फुर्+शतृ)–प्रभा–मण्डल (३.१) | by her with a radiant halo |
| चकासे | चकासे (√काश् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | shone |
| विदूरभूमिः | विदूर–भूमि (१.१) | the land of Vidūra gems |
| नवमेघशब्दात् | नव–मेघ–शब्द (५.१) | from the sound of a new cloud |
| उद्भिन्नया | उद्भिन्न (उद्√भिद्+क्त, ३.१) | revealed |
| रत्नशलाकया | रत्न–शलाका (३.१) | by a vein of jewels |
| इव | इव | like |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | या | दु | हि | त्रा | सु | त | रां | स | वि | त्री |
| स्फु | र | त्प्र | भा | म | ण्ड | ल | या | च | का | से |
| वि | दू | र | भू | मि | र्न | व | मे | घ | श | ब्दा |
| दु | द्भि | न्न | या | र | त्न | श | ला | क | ये | व |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.