निद्राविनोदितनितान्तरतिक्लमाना-
मायामिमङ्गलनिनादविबोधितानाम् ।
रामासु भाविविरहाकुलितासु यूनां
तत्पूर्वतामिव समादधिरे रतानि ॥
निद्राविनोदितनितान्तरतिक्लमाना-
मायामिमङ्गलनिनादविबोधितानाम् ।
रामासु भाविविरहाकुलितासु यूनां
तत्पूर्वतामिव समादधिरे रतानि ॥
मायामिमङ्गलनिनादविबोधितानाम् ।
रामासु भाविविरहाकुलितासु यूनां
तत्पूर्वतामिव समादधिरे रतानि ॥
अन्वयः
AI
निद्रा-विनोदित-नितान्त-रति-क्लमानाम्, आयामि-मङ्गल-निनाद-विबोधितानाम्, भावि-विरह-आकुलितासु रामासु, यूनाम् रतानि तत्-पूर्वताम् इव समादधिरे ।
English Summary
AI
For the young men, their love-making with the women—whose extreme fatigue from love-making was removed by sleep, who were awakened by continuous auspicious morning sounds, and who were distressed by impending separation—seemed to assume an unprecedented quality.
सारांश
AI
निद्रा से रति की थकान दूर होने के बाद मांगलिक ध्वनियों से जागी हुई स्त्रियों का प्रियतमों के साथ मिलन, भावी विरह की व्याकुलता के बीच भी नवीन जैसा प्रतीत हुआ।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
निद्रेति ॥ निद्रया विनोदितोऽपनीतो नितान्तमत्यर्थं यो रत्याः क्लमः स येषां तेषामायामिभिरायामवद्भिर्दीर्घैर्मङ्गलनिनादैर्वैबोधिकध्वनिभिर्विवोधितानां यूनां रामासु ।
सुन्दरी रमणी रामा इत्यमरः (अमरकोशः २.६.४ ) । भाविविरहेणाकुलितासु सतीषु रतानि । तान्येव "पूर्वाणि प्रथमानि तत्पूर्वाणि तेषां भावस्तत्पूर्वता ताम् । भावे तल्प्रत्ययः । समादधिरे प्रापुरिवेत्युत्प्रेक्षा । आद्यसुरतवदादरात्प्रवर्तन्त इत्यर्थः । यदुत्तरकालं दुर्लभं तदतितृष्णयानुभूयत इत्यर्थः ॥
पदच्छेदः
AI
| निद्राविनोदितनितान्तरतिक्लमानाम् | निद्रा–विनोदित (वि√नुद्+णिच्+क्त)–नितान्त–रति–क्लम (६.३) | of those whose extreme fatigue from love-making was removed by sleep |
| आयामिमङ्गलनिनादविबोधितानाम् | आयामिन्–मङ्गल–निनाद–विबोधित (वि√बुध्+णिच्+क्त, ६.३) | of those awakened by continuous auspicious sounds |
| रामासु | रामा (७.३) | among the women |
| भाविविरहाकुलितासु | भाविन्–विरह–आकुलित (७.३) | distressed by impending separation |
| यूनाम् | युवन् (६.३) | of the young men |
| तत्पूर्वताम् | तत्–पूर्वता (२.१) | the state of being unprecedented |
| इव | इव | as if |
| समादधिरे | समादधिरे (सम्+आ√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | assumed |
| रतानि | रत (१.३) | the love-makings |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | द्रा | वि | नो | दि | त | नि | ता | न्त | र | ति | क्ल | मा | ना |
| मा | या | मि | म | ङ्ग | ल | नि | ना | द | वि | बो | धि | ता | नाम् |
| रा | मा | सु | भा | वि | वि | र | हा | कु | लि | ता | सु | यू | नां |
| त | त्पू | र्व | ता | मि | व | स | मा | द | धि | रे | र | ता | नि |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.