अन्वयः
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उद्धत-मनोभव-रागा मानवती अपि योषित् दयित-अङ्कम् ययौ । खलु अनिभृता वारुणी गुण-दोषे रहस्य-विभेदम् कारयति ।
English Summary
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Even a proud woman, her passion aroused by love, went to her beloved's lap. Indeed, unrestrained wine causes the breaking of reserve, disregarding matters of virtue and fault.
सारांश
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मद के कारण तीव्र कामवासना वाली मानिनी स्त्रियाँ भी अपने प्रियतम की गोद में जा बैठीं; वास्तव में मदिरा गुण-दोष का विचार किए बिना हृदय के गुप्त रहस्यों को प्रकट कर देती है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
योषिदिति ॥ उद्धत उत्कटो मनोभवेन यो रागः प्रीतिः स यस्याः सा योषिन्मानवत्यपि दयितस्याङ्कं ययौ । यतो मानाद्रागो बलीयानिति भावः । लाघवदोषं परिहरतिकारयतीति । अनिभृता चपला । न कार्यकारिणीत्यर्थः। वारुणी मदिरा गुणेषु दोषेषु च विषये । सर्वोऽपि द्वन्द्वो विभाषयैकवद्भवति । रहस्यविभेदं रहस्यभङ्गं कारयति खलु । बलान्निगूहितावपि गुणदोषौ प्रकाशयतीत्यर्थः । यतो निगूढरागप्रकटनं प्रकटमानत्यागश्च प्रमत्ताया न लाघवमावहति । अबुद्धिपूर्वकत्वादिति भावः ॥
पदच्छेदः
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| योषित् | योषित् (१.१) | a woman |
| उद्धतमनोभवरागा | उद्धत (उद्√हन्+क्त)–मनोभव–राग (१.१) | whose passion of love was aroused |
| मानवती | मानवत् (१.१) | a proud woman |
| अपि | अपि | even |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | went |
| दयिताङ्कम् | दयित–अङ्क (२.१) | to the lap of her beloved |
| कारयति | कारयति (√कृ +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | causes |
| अनिभृता | अनिभृता (१.१) | unrestrained |
| गुणदोषे | गुण–दोष (७.२) | in matters of virtue and fault |
| वारुणी | वारुणी (१.१) | wine |
| खलु | खलु | indeed |
| रहस्यविभेदम् | रहस्य–विभेद (२.१) | the breaking of reserve |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यो | षि | दु | द्ध | त | म | नो | भ | व | रा | गा |
| मा | न | व | त्य | पि | य | यौ | द | यि | ता | ङ्कम् |
| का | र | य | त्य | नि | भृ | ता | गु | ण | दो | षे |
| वा | रु | णी | ख | लु | र | ह | स्य | वि | भे | दम् |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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