अन्वयः
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मधु-मदः बद्ध-कोप-विकृतीः अपि रामाः चारुता-अभिमतताम् उपनिन्ये । (तथैव) दयितानाम् वश्यताम् (उपनिन्ये) । सर्वः आत्म-वर्ग-हितम् इच्छति हि ।
English Summary
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The intoxication from wine brought even the women disfigured by fits of anger to a state of charming desirability. It also brought them under the control of their lovers. Indeed, everyone desires the well-being of their own side.
सारांश
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मदिरा के मद ने स्त्रियों के क्रोधजन्य विकारों को भी सौंदर्य में बदलकर उन्हें प्रियतमों के लिए वश में कर दिया; क्योंकि अपना पक्ष (मद) सदा अपनों का हित ही चाहता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
बद्धेति ॥ बद्धा कोपेन विकृतिर्याभिस्तास्तथाभूता अपि रामाः कर्म चारुता तासां सौन्दर्यं कर्त्रा अभिमततां प्रियवाल्लभ्यमुपनिन्ये । सौन्दर्ये हि विकृतिमपि रोचयत इति भावः। मधुमदो दयितानां वश्यतां विधेयत्वमुपनिन्ये । तथाहि । सर्व आत्मवर्गहितमिच्छति । अतश्चारुता स्त्रीत्वात्स्त्रीणामुपचकार । मधुमदस्तु पुंस्त्वात्पुंसामिति युक्तमित्यर्थः । अत्र विकृता अप्यभिमताः कुपिता अपि वश्या इति विरोधस्य चारुतामदाभ्यां समाधानादुभयथापि विरोधाभासो भवन्नर्थान्तरन्यासेन संसृज्यते ॥
पदच्छेदः
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| बद्धकोपविकृतीः | बद्ध (√बन्ध्+क्त)–कोप–विकृति (२.३) | disfigured by fits of anger |
| अपि | अपि | even |
| रामाः | रामा (२.३) | the lovely women |
| चारुताभिमतताम् | चारुता–अभिमत (अभि√मन्+क्त)–ता (२.१) | to the state of being charmingly desirable |
| उपनिन्ये | उपनिन्ये (उप√नी कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | led to |
| वश्यताम् | वश्यता (२.१) | submissiveness |
| मधुमदः | मधु–मद (१.१) | the intoxication of wine |
| दयितानाम् | दयित (६.३) | of the lovers |
| आत्मवर्गहितम् | आत्मन्–वर्ग–हित (२.१) | the good of one's own side |
| इच्छति | इच्छति (√इष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | desires |
| सर्वः | सर्व (१.१) | everyone |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब | द्ध | को | प | वि | कृ | ती | र | पि | रा | मा |
| श्चा | रु | ता | भि | म | त | ता | मु | प | नि | न्ये |
| व | श्य | तां | म | धु | म | दो | द | यि | ता | ना |
| मा | त्म | व | र्ग | हि | त | मि | च्छ | ति | स | र्वः |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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