शङ्किताय कृतबाष्पनि-
पातामीर्ष्यया विमुखितां दयिताय ।
मानिनिमभिमुखाहित-
चित्तां शंसति स्म घनरोमविभेदः ॥
शङ्किताय कृतबाष्पनि-
पातामीर्ष्यया विमुखितां दयिताय ।
मानिनिमभिमुखाहित-
चित्तां शंसति स्म घनरोमविभेदः ॥
पातामीर्ष्यया विमुखितां दयिताय ।
मानिनिमभिमुखाहित-
चित्तां शंसति स्म घनरोमविभेदः ॥
अन्वयः
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घनरोमविभेदः शङ्किताय दयिताय, ईर्ष्यया विमुखितां कृतबाष्पनिपाताम् अपि, अभिमुखाहितचित्तां मानिनीं शंसति स्म।
English Summary
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To her doubtful lover, the dense sprouting of goosebumps on the proud woman's skin revealed her true feelings. It showed that her heart was favorably disposed towards him, even though she had turned her face away in jealousy and was shedding tears.
सारांश
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ईर्ष्यावश विमुख होकर बैठी मानिनी स्त्री के रोमाञ्च ने उसके हृदय के उस अनुराग को प्रकट कर दिया, जिसे वह आँसुओं के माध्यम से छिपाना चाहती थी।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
शङ्कितायेति ॥शङ्किताय दयितायाविश्वस्ताय नायकायेर्ष्यया विमुखितां विमुखीकृ ताम् । अतएव कृतबाष्पनिपातां मानिनीं धनरोमविभेद: सान्द्रपुलकोदयोऽभिमुखमाहितं चित्तं यया ताम् । निष्कोपामित्यर्थः । शंसति स्म । व्यनक्ति स्मेत्यर्थः । अन्यथा सात्त्विकानुयादिति भावः । अत्रापि पूर्वोक्तैव नायिका ॥ अथ संभोगशृङ्गारमाह । तत्रापि बाह्यरतमाह
पदच्छेदः
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| शङ्किताय | शङ्कित (√शङ्क्+क्त, ४.१) | to the doubtful |
| कृतबाष्पनिपाताम् | कृत–बाष्प–निपात (२.१) | who was shedding tears |
| ईर्ष्यया | ईर्ष्या (३.१) | due to jealousy |
| विमुखिताम् | विमुखिता (२.१) | turned away |
| दयिताय | दयित (४.१) | to the beloved |
| मानिनीम् | मानिनी (२.१) | the proud woman |
| अभिमुखाहितचित्ताम् | अभिमुख–आहित (आ√धा+क्त)–चित्त (२.१) | whose mind was favorably disposed |
| शंसति | शंसति (√शंस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | revealed |
| स्म | स्म | (makes past tense) |
| घनरोमविभेदः | घन–रोमन्–विभेद (१.१) | the dense sprouting of horripilation |
छन्दः
आर्यागीतिः []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | ङ्कि | ता | य | कृ | त | बा | ष्प | नि | ||||
| पा | ता | मी | र्ष्य | या | वि | मु | खि | तां | द | यि | ता | य |
| मा | नि | नि | म | भि | मु | खा | हि | त | ||||
| चि | त्तां | शं | स | ति | स्म | घ | न | रो | म | वि | भे | दः |
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