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आशु कान्तमभिसारितवत्या
योषितः पुलकरुद्धकपोलम् ।
निर्जिगाय मुखमिन्दुमखण्डं
खण्डपत्रतिलकाकृति कान्त्या ॥

अन्वयः AI आशु कान्तम् अभिसारितवत्याः योषितः खण्डपत्रतिलकाकृति पुलकरुद्धकपोलं मुखं कान्त्या अखण्डम् इन्दुं निर्जिगाय।
English Summary AI The face of the woman who had quickly gone to meet her lover surpassed the full moon in beauty. Her face, adorned with a decorative mark of musk and with cheeks covered in horripilation from excitement, outshone the moon.
सारांश AI शीघ्रता से प्रियतम के पास पहुँचने वाली उस स्त्री के रोमांचित कपोलों और पत्रलेख से सजे मुख ने अपनी कांति से पूर्ण चंद्रमा को भी जीत लिया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) आश्विति ॥ आशु कान्तमभिसारितवत्या अभिगतवत्याः । स्वार्थे णिच् । योषितः संबन्धि पुलकै रुद्धाचावृतौ कपोलौ यस्य तत् । खण्डा प्रसृष्टा पत्राणां पत्रलेखानां तिलकस्य चाकृतिः संनिवेशो यस्य तत्तथोक्तं मुखं कान्त्याखण्डं पूर्णमिन्दुं निर्जिगाय जयति स्मेत्यार्थीयमुपमा। जयति द्वेष्टि इति दण्डिना सादृश्यार्थेषु गणनात् ॥ अथ युग्मेन सखीनायिकासंवादमाह
पदच्छेदः AI
आशुआशु quickly
कान्तम्कान्त (२.१) her lover
अभिसारितवत्याःअभिसारितवत् (अभि√सृ+णिच्+क्तवतु, ६.१) of her who had gone to meet
योषितःयोषित् (६.१) of the woman
पुलकरुद्धकपोलम्पुलकरुद्ध (√रुध्+क्त)कपोल (२.१) whose cheeks were covered with horripilation
निर्जिगायनिर्जिगाय (निर्√जि कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) surpassed
मुखम्मुख (१.१) the face
इन्दुम्इन्दु (२.१) the moon
अखण्डम्अखण्ड (२.१) full
खण्डपत्रतिलकाकृतिखण्डपत्रतिलकआकृति (१.१) which had the form of a decorative mark of musk leaves
कान्त्याकान्ति (३.१) with its beauty
छन्दः स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
शु का न्त भि सा रि त्या
यो षि तः पु रु द्ध पो लम्
नि र्जि गा मु मि न्दु ण्डं
ण्ड त्र ति का कृ ति का न्त्या
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