अन्वयः
AI
अधिनाथनिवासं प्रस्थिताभिः, ध्वंसितप्रियसखीवचनाभिः मानिनीभिः, अपहस्तितधैर्यः सादयन् इव मदः अवललम्बे।
English Summary
AI
The proud women, having set out for their lovers' homes after disregarding their friends' advice, resorted to intoxication. This passion, which cast aside their patience, was embraced as if it were causing them to falter, helping them overcome their hesitation.
सारांश
AI
सखियों की बातों को अनसुना कर अपने स्वामियों के पास जाने वाली मानिनी स्त्रियों के धैर्य को नष्ट करते हुए, मादकता ने उन्हें ऐसे जकड़ लिया मानो वह उन्हें शिथिल कर रही हो।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
प्रस्थिताभिरिति ॥ अधिनाथनिवासं प्रियगृहं प्रति प्रस्थिताभिः प्रचलिताभिर्ध्वम्सितानि खण्डितानि प्रियसखीवचनानि स्वयं प्रस्थानं लाघवायेत्येवंरूपाणि याभिस्ताभिर्मानिनीभिः कोपनाभिः।
स्त्रीणामीर्ष्याकृतः कोपो मानोऽन्यासङ्गिनि प्रिये इति लक्षणात् । अपहस्तितं निरस्तं धैर्यं येन स तथा सादयन्मानं शरीरं च कर्षयन्नपि । सदोषोऽपीत्यर्थः। मदोऽवललम्बे स्वीकृतः अज्ञानव्याजेन लाघवापह्नवसौकर्यादिति भावः॥
पदच्छेदः
AI
| प्रस्थिताभिः | प्रस्थित (प्र√स्था+क्त, ३.३) | by those who had set out |
| अधिनाथनिवासम् | अधिनाथ–निवास (२.१) | to the lord's residence |
| ध्वंसितप्रियसखीवचनाभिः | ध्वंसित (√ध्वंस्+क्त)–प्रिय–सखी–वचन (३.३) | by those who had disregarded the words of their dear friends |
| मानिनीभिः | मानिनी (३.३) | by the proud women |
| अपहस्तितधैर्यः | अपहस्तित (अप√हस्+क्त)–धैर्य (१.१) | by which patience was cast aside |
| सादयन् | सादयत् (√सद्+णिच्+शतृ, १.१) | as if causing to falter |
| इव | इव | as if |
| मदः | मद (१.१) | intoxication |
| अवललम्बे | अवललम्बे (अव√लम्ब् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was resorted to |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | स्थि | ता | भि | र | धि | ना | थ | नि | वा | सं |
| ध्वं | सि | त | प्रि | य | स | खी | व | च | ना | भिः |
| मा | नि | नी | भि | र | प | ह | स्ति | त | धै | र्यः |
| सा | द | य | न्नि | व | म | दो | ऽव | ल | ल | म्बे |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.