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संविधातुमभिषेकमुदासे
मन्मथस्य लसदंशुजलौघः ।
यामिनीवनितया ततचिह्नः
सोत्पलो रजतकुम्भ इवेन्दुः ॥

अन्वयः AI लसदंशुजलौघः, यामिनीवनितया ततचिह्नः, सोत्पलः इन्दुः, मन्मथस्य अभिषेकं संविधातुम्, रजतकुम्भः इव उदासे।
English Summary AI The moon, with its flood of shining rays like water, marked with a spot (like a blue lotus) by the lady Night, stood ready like a silver pot filled with water and lotuses, to perform the coronation of Manmatha, the god of love.
सारांश AI अपनी किरणों के जल-प्रवाह से युक्त और कलंक रूपी नीलकमल के चिन्ह वाला चंद्रमा, रात्रि रूपी नायिका द्वारा कामदेव के राज्याभिषेक के लिए उठाए गए चांदी के घड़े के समान सुशोभित हुआ।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) संविधातुमिति ॥ यामिनी वनितेव तया रात्रिरूपया कान्तया मन्मथस्याभिषेकं त्रिभुवनजैत्रयात्राभिषेकं संविधातुं सम्यक्कर्तुमंशवो जलानीव तेषामोघः पूरो लसन्यस्मिन्सः । ततचिह्नः स्फुटलाञ्छन इन्दुः सोत्पलो रजतकुम्भ इवोदास उत्क्षिप्तः । अस्यतेः कर्मणि लिट् । अत्र संविधातुमिति तुमुना प्रतीयमानोत्प्रेक्षयानुप्राणितोऽयमुपमोत्प्रेक्षयोः संकरः ॥
पदच्छेदः AI
संविधातुम्संविधातुम् (सम्+वि√धा+तुमुन्) to perform
अभिषेकम्अभिषेक (२.१) the coronation
उदासेउदासे (उत्√आस् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) was ready
मन्मथस्यमन्मथ (६.१) of Manmatha (the god of love)
लसदंशुजलौघःलसत् (√लस्+शतृ)अंशुजलओघ (१.१) who had a flood of shining rays like water
यामिनीवनितयायामिनीवनिता (३.१) by the lady Night
ततचिह्नःतत (√तन्+क्त)चिह्न (१.१) marked
सोत्पलःउत्पल (१.१) with a lotus
रजतकुम्भःरजतकुम्भ (१.१) a silver pot
इवइव like
इन्दुःइन्दु (१.१) the moon
छन्दः स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
सं वि धा तु भि षे मु दा से
न्म स्य दं शु लौ घः
या मि नी नि या चि ह्नः
सो त्प लो कु म्भ वे न्दुः
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