Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

प्रेरितः शशधरेण करौघः
संहतान्यपि नुनोद तमांसि ।
क्षीरसिन्धुरिव मन्दरभिन्नः
काननान्यविरलोच्चतरूणि ॥

अन्वयः AI शशधरेण प्रेरितः करौघः संहतानि तमांसि अपि, मन्दरभिन्नः क्षीरसिन्धुः इव, अविरलोच्चतरूणि काननानि नुनोद।
English Summary AI Sent forth by the moon, the flood of rays dispelled even the dense darkness, just as the milk ocean, when churned by the Mandara mountain, floods the forests with their dense and tall trees.
सारांश AI चंद्रमा द्वारा प्रेरित किरणों के समूह ने घने अंधकार को वैसे ही छिन्न-भिन्न कर दिया, जैसे मंदराचल पर्वत से मथे गए क्षीर सागर के जल ने ऊंचे और सघन वृक्षों वाले वनों को आप्लावित कर दिया था।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) प्रेरित इति ॥ शशधरेण चन्द्रेण प्रेरितो विसृष्टः करौघ: संहतानि सान्द्राण्यपि तमांसि मन्दरेण मन्दराचलेन भिन्नो नुन्नः क्षीरसिन्धुरविरलाः सान्द्रा उच्चा उन्नताश्च तरवो येषु तानि काननानीव नुनोद दूरीचकार ॥
पदच्छेदः AI
प्रेरितःप्रेरित (प्र√ईर्+क्त, १.१) Sent forth
शशधरेणशशधर (३.१) by the moon
करौघःकरओघ (१.१) the flood of rays
संहतानिसंहत (सम्√हन्+क्त, २.३) dense
अपिअपि even
नुनोदनुनोद (√नुद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) dispelled
तमांसितमस् (२.३) the darknesses
क्षीरसिन्धुःक्षीरसिन्धु (१.१) the milk ocean
इवइव like
मन्दरभिन्नःमन्दरभिन्न (√भिद्+क्त, १.१) churned by the Mandara mountain
काननानिकानन (२.३) the forests
अविरलोच्चतरूणिअविरलउच्चतरु (२.३) which had dense and tall trees
छन्दः स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
प्रे रि तः रे रौ घः
सं ता न्य पि नु नो मां सि
क्षी सि न्धु रि न्द भि न्नः
का ना न्य वि लो च्च रू णि
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.