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उद्गतेन्दुमविभिन्नतमिस्रां
पश्यति स्म रजनीमवितृप्तः ।
व्यंशुकस्फुटमुखीमतिजिह्मां
व्रीडया नववधूमिव लोकः ॥

अन्वयः AI लोकः अवितृप्तः (सन्) उद्गत-इन्दुम् अविभिन्न-तमिस्राम् रजनीम्, व्रीडया अति-जिह्माम् वि-अंशुक-स्फुट-मुखीम् नव-वधूम् इव, पश्यति स्म ।
English Summary AI The people, unsatisfied, looked at the night—in which the moon had risen but the darkness was not yet dispelled—as one looks at a new bride whose face is revealed as her veil is removed, but who is very shy and averted due to modesty.
सारांश AI चंद्रमा के उदय होने पर भी जहाँ अंधकार पूरी तरह मिटा नहीं था, उस रात्रि को लोग अपलक देखते रहे; वह रात्रि लज्जा के कारण झुककर अपना मुख दिखाने वाली नववधू के समान प्रतीत हो रही थी।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) उद्गतेन्दुमिति ॥ लोको जनः । लोकस्तु भुवने जने इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२ ) । उद्गतेन्दुमुदितचन्द्रामविभिन्नतमिस्रामनि:शेषितध्वान्तां रजनीं व्यंशुकमपनीतावगुण्ठनमत एव स्फुटं दृश्यमानं मुखं यस्याः सा तां तथापि व्रीडयातिजिह्मां वक्रां नववधूं नवोढाम् । वधूर्नवोढयोषायां स्नुषाभार्याङ्गनासु च इति धरणिः । स्त्रियमिवावितृप्तः सन्पश्यति स्म ।
पदच्छेदः AI
उद्गतेन्दुमविभिन्नतमिस्रांउद्गत (उत्√इ+क्त)इन्दुअविभिन्न (अ√भिद्+क्त)तमिस्रा (२.१) in which the moon had risen but darkness was not dispelled
पश्यतिपश्यति (√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) saw
स्मस्म (past tense marker)
रजनीम्रजनी (२.१) the night
अवितृप्तःअवितृप्त (१.१) unsatisfied
व्यंशुकस्फुटमुखीम्विअंशुकस्फुटमुख (२.१) whose face was revealed as her veil was removed
अतिजिह्मांअतिजिह्म (२.१) very shy/averted
व्रीडयाव्रीडा (३.१) due to modesty
नववधूमिवनववधू (२.१)इव like a new bride
लोकःलोक (१.१) the people
छन्दः स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
द्ग ते न्दु वि भि न्न मि स्रां
श्य ति स्म नी वि तृ प्तः
व्यं शु स्फु मु खी ति जि ह्मां
व्री या धू मि लो कः
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