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मध्यमोपलनिभे लसदंशा-
वेकतश्च्युतिमुपेयुषि भानौ ।
द्यौरुवाह परिवृत्तिविलोलां
हारयष्टिमिव वासरलक्ष्मीम् ॥

अन्वयः AI एकतः मध्यम-उपल-निभे लसत्-अंशौ भानौ च्युतिम् उपेयुषि (सति), द्यौः परिवृत्ति-विलोलाम् वासर-लक्ष्मीम् हार-यष्टिम् इव उवाह ।
English Summary AI As the sun, resembling a central gem with shining rays on one side, began to set, the sky bore the splendor of the day, which was trembling as it turned, like a string of pearls.
सारांश AI सूर्य रूपी मध्य मणि के एक ओर झुक जाने पर आकाश ने दिन की शोभा को एक ओर खिसकती हुई चंचल मुक्तावली के समान धारण किया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) मध्येति ॥ मध्यमोपलनिभे नायकमणिसदृशे । निभसंकाशनीकाशप्रतिरूपोपमादयः इत्यमरः (अमरकोशः २.१०.३८ ) शर्करायां स्त्रियां प्रोक्तः पुंस्यश्मन्युपलो मणौ इति वैजयन्ती। लसदंशौ प्रसरद्रश्मौ भानावेकत एकस्सिन्भागे च्युतिं स्रस्ततामुपेयुषि प्राप्ते सति द्यौः परिवृत्त्या मध्याह्नातिक्रमेण विलोलां गत्वरीम् । अन्यत्र गात्रस्य तिर्यगावृत्त्या मुहुश्चलन्तीम् । वासरलक्ष्मीं हारयष्टिं मुक्तावलीमिवोवाह वहति स्म ।
पदच्छेदः AI
मध्यमोपलनिभेमध्यमउपलनिभ (७.१) resembling a central gem,
लसदंशौलसत् (√लस्+शतृ)अंशु (७.१) with shining rays,
एकतःएकतः on one side
च्युतिम्च्युति (२.१) decline
उपेयुषिउपेयिवस् (उप√इ+क्वसु, ७.१) having approached
भानौभानु (७.१) the sun
द्यौःद्यु (१.१) the sky
उवाहउवाह (√वह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) bore
परिवृत्तिविलोलांपरिवृत्तिविलोल (२.१) trembling from turning around
हारयष्टिम्हारयष्टि (२.१) a string of pearls
इवइव like
वासरलक्ष्मीम्वासरलक्ष्मी (२.१) the splendor of the day
छन्दः स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
ध्य मो नि भे दं शा
वे श्च्यु ति मु पे यु षि भा नौ
द्यौ रु वा रि वृ त्ति वि लो लां
हा ष्टि मि वा क्ष्मीम्
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