प्रियैः सलीलं करवारिवारितः
प्रवृद्धनिःश्वासविकम्पितस्तनः ।
सविभ्रमाधूतकराग्रपल्लवो
यथार्थतामाप विलासिनीजनः ॥
प्रियैः सलीलं करवारिवारितः
प्रवृद्धनिःश्वासविकम्पितस्तनः ।
सविभ्रमाधूतकराग्रपल्लवो
यथार्थतामाप विलासिनीजनः ॥
प्रवृद्धनिःश्वासविकम्पितस्तनः ।
सविभ्रमाधूतकराग्रपल्लवो
यथार्थतामाप विलासिनीजनः ॥
अन्वयः
AI
प्रियैः सलीलम् कर-वारि-वारितः, प्रवृद्ध-निःश्वास-विकम्पित-स्तनः, स-विभ्रम-आधूत-कर-अग्र-पल्लवः विलासिनी-जनः यथार्थताम् आप।
English Summary
AI
The group of amorous women, playfully splashed with water from their beloveds' hands, their breasts trembling with heavy sighs, and their sprout-like fingertips shaken with coquetry, truly lived up to their name as 'vilasinis' (coquettes).
सारांश
AI
प्रियतमों द्वारा क्रीड़ापूर्वक जल फेंके जाने पर लंबी साँसों से कांपते स्तनों और चंचल हाथों वाली वे स्त्रियाँ वास्तव में 'विलासिनी' नाम को सार्थक कर रही थीं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
प्रियैरिति ॥ प्रियैः कामिभिः सलीलं करवारिभिरञ्जलिजलैर्वारितोऽवरुद्धः। सिक्त इत्यर्थः । प्रवृद्धै संततैर्निःश्वासैर्विकम्पितौ स्तनौ यस्य सः । सविभ्रमं सविलासमाधूतानि कराग्रपल्लवानि पाणिपल्लवानि येन सः। विलसनशीला विलासिनी । मै कषलसकत्थस्रम्भः
इति धिनुण्प्रत्ययः । सैव जनः । जातावेकवचनम् । यथार्थतामाप । उक्तरीत्यानेकर्विलासवत्तया यथार्थनामकत्वमवापेत्यर्थः ।क्वचिद्गम्यमानार्थस्याप्रयोगः इति नाम्नो न प्रयोगः । यथा माधे-~~-चिराय याथार्थ्यमलम्भि दिग्गजैः इति। क्वचित्प्रयुज्यते च । यथा रघुवंशे—"परंतपो नाम यथार्थनामा इति। नैषधेऽपि-स जयत्यरिसार्थसार्थकीकृतनामा किल भीमभूपतिः इति । स्वभावोक्तिरलंकारः॥
पदच्छेदः
AI
| प्रियैः | प्रिय (३.३) | by their beloveds, |
| सलीलं | सलीलम् | playfully |
| करवारिवारितः | कर–वारि–वारित (१.१) | splashed with water from their hands, |
| प्रवृद्धनिःश्वासविकम्पितस्तनः | प्रवृद्ध–निःश्वास–विकम्पित–स्तन (१.१) | his/her breasts trembling with heavy sighs, |
| सविभ्रमाधूतकराग्रपल्लवः | सविभ्रम–आधूत–कर–अग्र–पल्लव (१.१) | shaking his/her sprout-like fingertips with coquetry, |
| यथार्थताम् | यथार्थता (२.१) | the state of being true to their name |
| आप | आप (√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attained |
| विलासिनीजनः | विलासिनी–जन (१.१) | the group of amorous women. |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रि | यैः | स | ली | लं | क | र | वा | रि | वा | रि | तः |
| प्र | वृ | द्ध | निः | श्वा | स | वि | क | म्पि | त | स्त | नः |
| स | वि | भ्र | मा | धू | त | क | रा | ग्र | प | ल्ल | वो |
| य | था | र्थ | ता | मा | प | वि | ला | सि | नी | ज | नः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.