परिस्फुरन्मीनविघट्टितोरवः
सुराङ्गनास्त्रासविलोलदृष्टयः ।
उपाययुः कम्पितपाणिपल्लवाः
सखीजनस्यापि विलोकनीयताम् ॥
परिस्फुरन्मीनविघट्टितोरवः
सुराङ्गनास्त्रासविलोलदृष्टयः ।
उपाययुः कम्पितपाणिपल्लवाः
सखीजनस्यापि विलोकनीयताम् ॥
सुराङ्गनास्त्रासविलोलदृष्टयः ।
उपाययुः कम्पितपाणिपल्लवाः
सखीजनस्यापि विलोकनीयताम् ॥
अन्वयः
AI
परिस्फुरत्-मीन-विघट्टित-ऊरवः, त्रास-विलोल-दृष्टयः, कम्पित-पाणि-पल्लवाः सुर-अङ्गनाः सखी-जनस्य अपि विलोकनीयताम् उपाययुः।
English Summary
AI
The celestial women, their thighs brushed by darting fish, their glances flickering with fear, and their sprout-like hands trembling, became a captivating sight even for their own friends.
सारांश
AI
चंचल मछलियों के स्पर्श से भयभीत देवांगनाएँ अपने कांपते हाथों और व्याकुल दृष्टि के कारण अपनी सखियों के लिए भी कौतूहल और विशेष आकर्षण का केंद्र बन गईं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
परीति ॥ परितः स्फुरद्भिर्विवर्तमानैर्मीनैर्विघट्टिता ऊरवो यासां ता अतएव त्रासविलोलदृष्टयो भयविकसन्नेत्राः कम्पितपाणिपल्लवाश्च सुराङ्गनाः सखीजनस्यापि विलोकनीयतामुपाययुः । किमुत प्रियजनस्येति भावः । स्वभावोक्तिरलंकारः ॥
पदच्छेदः
AI
| परिस्फुरन्मीनविघट्टितोरवः | परिस्फुरत् (परि√स्फुर्+शतृ)–मीन–विघट्टित (वि√घट्ट्+क्त)–ऊरु (१.३) | their thighs brushed by darting fish, |
| सुराङ्गनाः | सुर–अङ्गना (१.३) | the celestial women, |
| त्रासविलोलदृष्टयः | त्रास–विलोल–दृष्टि (१.३) | their glances flickering with fear, |
| उपाययुः | उपाययुः (उप+आ√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | became |
| कम्पितपाणिपल्लवाः | कम्पित (√कम्प्+क्त)–पाणि–पल्लव (१.३) | their sprout-like hands trembling, |
| सखीजनस्यापि | सखीजन (६.१)–अपि | even for their own friends |
| विलोकनीयताम् | विलोकनीयता (वि√लोक्+अनीयर्+ता, २.१) | an object of sight. |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | रि | स्फु | र | न्मी | न | वि | घ | ट्टि | तो | र | वः |
| सु | रा | ङ्ग | ना | स्त्रा | स | वि | लो | ल | दृ | ष्ट | यः |
| उ | पा | य | युः | क | म्पि | त | पा | णि | प | ल्ल | वाः |
| स | खी | ज | न | स्या | पि | वि | लो | क | नी | य | ताम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.