शुभाननाः साम्बुरुहेषु भीरवो
विलोलहाराश्चलफेनपङ्क्तिषु ।
नितान्तगौर्यो हृतकुङ्कुमेष्वलं
न लेभिरे ताः परभागमूर्मिषु ॥
शुभाननाः साम्बुरुहेषु भीरवो
विलोलहाराश्चलफेनपङ्क्तिषु ।
नितान्तगौर्यो हृतकुङ्कुमेष्वलं
न लेभिरे ताः परभागमूर्मिषु ॥
विलोलहाराश्चलफेनपङ्क्तिषु ।
नितान्तगौर्यो हृतकुङ्कुमेष्वलं
न लेभिरे ताः परभागमूर्मिषु ॥
अन्वयः
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भीरवः ताः शुभ-आननाः स-अम्बुरुहेषु ऊर्मिषु, विलोल-हाराः चल-फेन-पङ्क्तिषु (ऊर्मिषु), नितान्त-गौर्यः हृत-कुङ्कुमेषु (ऊर्मिषु) अलम् परभागम् न लेभिरे।
English Summary
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The timid women, though their lovely faces rivaled the lotuses, their swinging necklaces the rows of foam, and their fair complexion the saffron-less water, could not attain superiority over the waves themselves.
सारांश
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सुंदर मुख और चंचल हारों वाली वे स्त्रियाँ, जिनका कुंकुम धुल गया था, जल की लहरों और कमलों के बीच अपनी अत्यधिक गौरवर्ण आभा के कारण अनुपम शोभा पा रही थीं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
शुभेति ॥ शुभानना विलोलहारा नितान्तगौर्योऽरुणाङ्ग्य:।
गौरोऽरुणे सिते पीते इति वैजयन्ती। भीरवस्ताः स्त्रियः साम्बुरुहेषु चलाः फेनपङ्क्तयो येषु तेषु हृतानि कुङ्कुमानि यैस्तेषु । कुङ्कुमसंक्रमारुणेष्वित्यर्थः । ऊर्मिषु विषयेष्वलमत्यर्थं परभागं गुणोत्कर्षं न लेभिरे । परभागो गुणोत्कर्षः इति यादवः । तासामूर्मीणां चारुणत्वादिगुणसाम्यान्न कश्चिद्विशेषो लक्ष्यत इत्यर्थः । अत एव सामान्यालंकार:—सामान्यं गुणसाम्येन यत्र वस्त्वन्तरैकता इति लक्षणात् । शुभाननत्वसाम्बुरुहत्वाद्युभयविशेषणानां क्रमेणोभयस्मिन्समन्वयाद्यथासंख्यालंकारश्च । यथासंख्यं क्रमेणैव क्रमिकाणां समन्वयात् इति काव्यप्रकाशे लक्षणात् । अनयोरङ्गाङ्गिभावेन संकरः ॥ हृदाम्भसि व्यस्तवधूकराहते रवं मृदङ्गध्वनिधीरमुज्झति । मुहुस्तनैस्तालसमं समाददे मनोरमं नृत्यमिव प्रवेपितम्
पदच्छेदः
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| शुभाननाः | शुभ–आनन (१.३) | the women with lovely faces |
| साम्बुरुहेषु | स–अम्बुरुह (७.३) | among the waves with lotuses, |
| भीरवः | भीरु (१.३) | the timid women, |
| विलोलहाराः | विलोल–हार (१.३) | with their swinging necklaces |
| चलफेनपङ्क्तिषु | चल–फेन–पङ्क्ति (७.३) | among the moving rows of foam, |
| नितान्तगौर्यः | नितान्त–गौरी (१.३) | the extremely fair women |
| हृतकुङ्कुमेषु | हृत (√हृ+क्त)–कुङ्कुम (७.३) | among the waves from which saffron was washed away, |
| अलं | अलम् | greatly |
| न | न | not |
| लेभिरे | लेभिरे (√लभ् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | did attain |
| ताः | तद् (१.३) | they |
| परभागम् | परभाग (२.१) | superiority |
| ऊर्मिषु | ऊर्मि (७.३) | over the waves. |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शु | भा | न | नाः | सा | म्बु | रु | हे | षु | भी | र | वो |
| वि | लो | ल | हा | रा | श्च | ल | फे | न | प | ङ्क्ति | षु |
| नि | ता | न्त | गौ | र्यो | हृ | त | कु | ङ्कु | मे | ष्व | लं |
| न | ले | भि | रे | ताः | प | र | भा | ग | मू | र्मि | षु |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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