विपक्षचित्तोन्मथना नखव्रणा-
स्तिरोहिता विभ्रममण्डनेन ये
हृतस्य शेषानिव कुङ्कुमस्य
तान्विकत्थनीयान्दधुरन्यथा स्त्रिय्-
अः
विपक्षचित्तोन्मथना नखव्रणा-
स्तिरोहिता विभ्रममण्डनेन ये
हृतस्य शेषानिव कुङ्कुमस्य
तान्विकत्थनीयान्दधुरन्यथा स्त्रिय्-
अः
स्तिरोहिता विभ्रममण्डनेन ये
हृतस्य शेषानिव कुङ्कुमस्य
तान्विकत्थनीयान्दधुरन्यथा स्त्रिय्-
अः
अन्वयः
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स्त्रियः ये विपक्ष-चित्त-उन्मथनाः नख-व्रणाः विभ्रम-मण्डनेन तिरोहिताः (आसन्), तान् अन्यथा विकत्थनीयान् हृतस्य कुङ्कुमस्य शेषान् इव दधुः।
English Summary
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The women bore the nail marks, which agitate the minds of their rivals and were concealed by graceful decorations, as if they were the remnants of removed saffron. Otherwise, these marks would have been something to boast about.
सारांश
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प्रसाधनों के धुल जाने पर सौतों के मन को दुखी करने वाले वे नख-क्षत पुनः स्पष्ट हो गए, जो स्त्रियों के लिए किसी गर्व से कम नहीं थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
विपक्षेति ॥ विपक्षस्य सपत्नीजनस्य चित्तानामुन्मथनाः । व्यथका इत्यर्थः । बहुलग्रहणात्कर्तरि ल्युट् ।ये नखव्रणा नखक्षतानि ।
व्रणोऽस्त्रियाम् इत्यमरः (अमरकोशः २.६.५४ ) । विभ्रमस्य सौन्दर्यस्य मण्डनम् । तादर्थ्येऽप्यश्वघासादिवत्यष्ठीसमासः । न तु चतुर्थीसमासो यूपदार्वादियत्प्रकृतिविकाराभावादिति । तेन कुङ्कुमलेपादिना तिरोहिताश्छन्ना इतस्य क्षालितस्य कुङ्कुमस्य । व्यञ्जकत्वेन शेषानिवावशिष्टलेशानिव स्थितानित्युत्प्रेक्षा । विकत्थनीयान्भर्तृवाल्लभ्यस्य व्यञ्जकत्वेन श्लाघनीयांस्तान्नखव्रणान्स्त्रियोऽन्यथा दधुः। प्रकाशं दधुरित्यर्थः ॥ अथ युग्मेनाहः-सरोजेत्यादिना ॥ सरोजपत्रे नुविलीनषट्पदे विलोलदृष्टेः स्विदमू विलोचने । शिरोरुहाः स्विन्नतपक्ष्मसंततेर्द्विरेफवृन्दं नु निशब्दनिश्चलम्
पदच्छेदः
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| विपक्षचित्तोन्मथनाः | विपक्ष–चित्त–उन्मथनाः (उद्√मन्थ्+युच्, १.३) | which agitate the minds of rivals, |
| नखव्रणाः | नख–व्रण (१.३) | the nail-marks, |
| तिरोहिताः | तिरोहित (तिरस्√धा+क्त, १.३) | concealed |
| विभ्रममण्डनेन | विभ्रम–मण्डन (३.१) | by graceful decorations, |
| ये | यद् (१.३) | which |
| हृतस्य | हृत (√हृ+क्त, ६.१) | of the removed |
| शेषान् | शेष (२.३) | remnants |
| इव | इव | as if |
| कुङ्कुमस्य | कुङ्कुम (६.१) | of saffron, |
| तान् | तद् (२.३) | them, |
| विकत्थनीयान् | विकत्थनीय (वि√कत्थ्+अनीयर्, २.३) | which would be something to boast of, |
| दधुः | दधुः (√धा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they bore |
| अन्यथा | अन्यथा | otherwise |
| स्त्रियः | स्त्री (१.३) | the women |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | प | क्ष | चि | त्तो | न्म | थ | ना | न | ख | व्र | णा |
| स्ति | रो | हि | ता | वि | भ्र | म | म | ण्ड | ने | न | ये |
| हृ | त | स्य | शे | षा | नि | व | कु | ङ्कु | म | स्य | ता |
| न्वि | क | त्थ | नी | या | न्द | धु | र | न्य | था | स्त्रि | यः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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