अन्वयः
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(कयाचित्) विलोलनीविना कलत्रभारेण, गलद्दुकूलस्तनशालिना उरसा, बलिव्यपायस्फुटरोमराजिना निरायतत्त्वात् ताम्यता उदरेण (मनः समाददे) ।
English Summary
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This verse describes a woman's state: strained by the weight of her hips with their loosened waist-knot; her chest adorned with breasts from which the silk garment was slipping; and her abdomen, stretched and strained, revealing the fine line of hair as the skin-folds disappeared. (This description continues in the next verse).
सारांश
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भारी नितम्बों, खिसकते रेशमी वस्त्रों और उन्नत स्तनों के भार से युक्त उस सुन्दरी का उदर भाग खिंचाव के कारण और अधिक कृश तथा शोभायमान दिखाई दे रहा था।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
कलत्रेति ॥विलोलनीविनागात्रोन्नमनाद्विश्लिष्टवस्त्रग्रन्थिना कलत्रभारेण श्रोणिभारेण।
कलत्रं श्रोणिभार्ययोः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१८७ ) । तथा गलत्स्रंसमानं दुकूलं याभ्यां ताभ्यां स्तनाभ्यां शालत इति तथोक्तेनोरसा तथा बलिव्यपायेन भङ्गिनिवृत्त्या स्फुटा रोमराजिर्यस्मिम्स्तेन निरायत्वादप्रसारितत्वात्ताम्यता तनुभवतोदरेण चोपलक्षितया । स्वभावोक्तिरलंकारः॥
पदच्छेदः
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| कलत्रभारेण | कलत्र–भार (३.१) | by the weight of her hips |
| विलोलनीविना | विलोल–नीवि (३.१) | with an unsteady waist-knot |
| गलद्दुकूलस्तनशालिना | गलत् (√गल्+शतृ)–दुकूल–स्तन–शालिन् (३.१) | by the chest, adorned with breasts from which the silk garment was slipping |
| उरसा | उरस् (३.१) | by the chest |
| बलिव्यपायस्फुटरोमराजिना | बलि–व्यपाय–स्फुट–रोमराजिन् (३.१) | by the abdomen, on which the line of hair was visible |
| निरायतत्त्वात् | निरायतत्व (५.१) | due to being stretched |
| उदरेण | उदर (३.१) | by the abdomen |
| ताम्यता | ताम्यत् (√तम्+शतृ, ३.१) | strained |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | ल | त्र | भा | रे | ण | वि | लो | ल | नी | वि | ना |
| ग | ल | द्दु | कू | ल | स्त | न | शा | लि | नो | र | सा |
| ब | लि | व्य | पा | य | स्फु | ट | रो | म | रा | जि | ना |
| नि | रा | य | त | त्वा | दु | द | रे | ण | ता | म्य | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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