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प्रियेऽपरा यच्छति वाचमुन्मुखी
निबद्धदृष्टिः शिथिलाकुलोच्चया ।
समादधे नांशुकमाहितं वृथा
विवेद पुष्पेषु न पाणिपल्लवम् ॥

अन्वयः AI अपरा प्रिये वाचम् यच्छति (सति), उन्मुखी, निबद्धदृष्टिः, शिथिलाकुलोच्चया (सती) आहितम् अंशुकं न समादधे, वृथा पुष्पेषु पाणिपल्लवं न विवेद ।
English Summary AI Another woman, while her beloved was speaking to her, stood with her face upturned and her gaze fixed on him. Her gathered garment became loose and dishevelled, but she did not adjust it. Lost in thought, she was unaware of her own sprout-like hand placed in vain among the flowers.
सारांश AI प्रियतम को एकटक निहारती हुई एक स्त्री प्रेम में इतनी सुध-बुध खो बैठी कि उसे अपने ढीले होते वस्त्रों और फूलों से हटते अपने हाथों का ध्यान ही न रहा।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) प्रिय इति । वाचं यच्छति ददति । समालपतीत्यर्थः ।दाणः शतृप्रत्ययः ।पाघ्ना- इत्यादिना यच्छादशे:। प्रिये निबद्धदृष्टिरत एवोन्मुखी शिथिलःश्लथ आकुलश्चलितश्च तादृश उच्चयो नीवीबन्धो यस्याः सा । नारीकट्यंशुकग्रन्थौ नीविः स्यादुश्चयोऽप्यथ इति मार्तण्डः । अपरान्या ख्यंशुकं न समादधे न बबन्ध । रागपारवश्यादिति भावः । पुष्पेषु वृथा व्यर्थमाहितमारोपितम् । अस्थाने प्रसारितमित्यर्थः । पाणिपल्लवं च न विवेद । प्रियासक्तचित्तत्वादिति भावः । एषा च प्रगल्भा नायिका।पाणिपल्लवम् इत्यत्रान्यतरसाधकबाधकप्रमाणाभावादुपमारूपकयोः संदेहसंकरः ॥
पदच्छेदः AI
प्रियेप्रिय (७.१) when her beloved
अपराअपर (१.१) another woman
यच्छतियच्छति (√यम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) was speaking
वाचम्वाच् (२.१) words
उन्मुखीउन्मुख (१.१) with face upturned
निबद्धदृष्टिःनिबद्ध (नि√बन्ध्+क्त)दृष्टि (१.१) with a fixed gaze
शिथिलाकुलोच्चयाशिथिलआकुलउच्चय (१.१) whose gathered garment was loose and dishevelled
समादधेसमादधे (सम्+आ√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) did adjust
not
अंशुकम्अंशुक (२.१) her garment
आहितंआहित (आ√धा+क्त, २.१) placed
वृथावृथा in vain
विवेदविवेद (√विद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) was aware of
पुष्पेषुपुष्प (७.३) among the flowers
not
पाणिपल्लवम्पाणिपल्लव (२.१) her sprout-like hand
छन्दः वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
प्रि ये ऽप रा च्छ ति वा मु न्मु खी
नि द्ध दृ ष्टिः शि थि ला कु लो च्च या
मा धे नां शु मा हि तं वृ था
वि वे पु ष्पे षु पा णि ल्ल वम्
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