स्वगोचरे सत्यपि वित्तहारिणा
विलोभ्यमानाः प्रसवेन शाखिनाम् ।
नभश्चराणामुपकर्तुमिच्छतां
प्रियाणि चक्रुः प्रणयेन योषितः ॥
स्वगोचरे सत्यपि वित्तहारिणा
विलोभ्यमानाः प्रसवेन शाखिनाम् ।
नभश्चराणामुपकर्तुमिच्छतां
प्रियाणि चक्रुः प्रणयेन योषितः ॥
विलोभ्यमानाः प्रसवेन शाखिनाम् ।
नभश्चराणामुपकर्तुमिच्छतां
प्रियाणि चक्रुः प्रणयेन योषितः ॥
अन्वयः
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योषितः स्वगोचरे सति अपि शाखिनां वित्तहारिणा प्रसवेन विलोभ्यमानाः (सत्यः), उपकर्तुम् इच्छतां नभश्चराणां प्रणयेन प्रियाणि चक्रुः ।
English Summary
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Although the captivating blossoms of the trees were within their own reach, the celestial ladies, being tempted by them, obliged the requests of their lovers, the sky-dwellers. Out of affection, they allowed their lovers, who wished to help, to pluck the flowers for them.
सारांश
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समीप में पुष्प होने पर भी वृक्षों की सुंदरता से लुभाती हुई उन स्त्रियों ने गन्धर्वों की प्रिय इच्छाओं को प्रेमपूर्वक पूरा कर उन्हें सुख प्रदान किया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
स्वगोचर इति । चित्तहारिणा मनोहरेण शाखिनां प्रसवेन पुष्पजातेन विलोभ्यमाना। आकृष्यमाणा योषितः स्वगोचरे स्वविषये । स्वकरप्रचये सत्यपीत्यर्थः। प्रसव इति शेषः । उपकर्तुं परिचरितुमिच्छतां नभश्चराणां गन्धर्वाणां प्रणयेन सहायहेतुना प्रियाणि चक्रुः । स्वकरग्राह्यमपि प्रसवं स्वकान्तप्रियार्थं तद्दीयमानमेवाग्रहीषुरित्यर्थः॥
पदच्छेदः
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| स्वगोचरे | स्व–गोचर (७.१) | within their own reach |
| सति | सत् (√अस्+शतृ, ७.१) | it being |
| अपि | अपि | even though |
| वित्तहारिणा | वित्त–हारिन् (√हृ+णिनि, ३.१) | by the captivating |
| विलोभ्यमानाः | विलोभ्यमान (वि√लुभ्+णिच्+शानच्, १.३) | being tempted |
| प्रसवेन | प्रसव (३.१) | by the blossoms |
| शाखिनाम् | शाखिन् (६.३) | of the trees |
| नभश्चराणाम् | नभस्–नभश्चर (√चर्+ट, ६.३) | of the sky-dwellers |
| उपकर्तुम् | उपकर्तुम् (उप√कृ+तुमुन्) | to oblige |
| इच्छताम् | इच्छत् (√इष्+शतृ, ६.३) | of those wishing |
| प्रियाणि | प्रिय (२.३) | pleasing acts |
| चक्रुः | चक्रुः (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | did |
| प्रणयेन | प्रणय (३.१) | out of affection |
| योषितः | योषित् (१.३) | the women |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | गो | च | रे | स | त्य | पि | वि | त्त | हा | रि | णा |
| वि | लो | भ्य | मा | नाः | प्र | स | वे | न | शा | खि | नाम् |
| न | भ | श्च | रा | णा | मु | प | क | र्तु | मि | च्छ | तां |
| प्रि | या | णि | च | क्रुः | प्र | ण | ये | न | यो | षि | तः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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