विदूरपातेन भिदामुपेयुष-
श्च्युताः प्रवाहादभितः प्रसारिणः ।
प्रियाङ्कशीताः शुचिमौक्तिकत्विषो
वनप्रहासा इव वारिबिन्दवः ॥
विदूरपातेन भिदामुपेयुष-
श्च्युताः प्रवाहादभितः प्रसारिणः ।
प्रियाङ्कशीताः शुचिमौक्तिकत्विषो
वनप्रहासा इव वारिबिन्दवः ॥
श्च्युताः प्रवाहादभितः प्रसारिणः ।
प्रियाङ्कशीताः शुचिमौक्तिकत्विषो
वनप्रहासा इव वारिबिन्दवः ॥
अन्वयः
AI
विदूरपातेन भिदाम् उपेयुषः, प्रवाहात् च्युताः, अभितः प्रसारिणः, प्रियाङ्कशीताः, शुचिमौक्तिकत्विषः वारिबिन्दवः वनप्रहासाः इव (आसन्) ।
English Summary
AI
Water drops, scattered by their fall from a great height, separated from the main stream and spread all around. Cool like a beloved's lap and lustrous as pure pearls, they appeared like the loud laughter of the forest.
सारांश
AI
ऊँचाई से गिरने के कारण बिखरती हुई जल की बूंदें मोतियों जैसी आभा वाली थीं और प्रियतम की गोद की तरह शीतल होकर वन की मधुर मुस्कान सी लग रही थीं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
विदूरेति ॥ विदूरपातेन भिदां भेदम् । "षिद्भिदादिभ्योऽङ्' । उपेयुष उपगतात्प्रवाहाच्च्युता अतएवाभितः प्रसारिणः प्रसर्पन्त इति प्रियाया अङ्क उत्सङ्ग इव शीताः शीतलाः शुचीनां मौक्तिकानां त्विष इव त्विषो येषां ते । किंच वनस्य प्रहासा इव स्थिता इत्युत्प्रेक्षा । वारिबिन्दवश्च । अत्रोपमयौरुभयोरुत्प्रेक्षायाश्च संसृष्टिः ॥
पदच्छेदः
AI
| विदूरपातेन | विदूर–पात (३.१) | by the fall from a great distance |
| भिदाम् | भिद् (२.१) | separation |
| उपेयुषः | उपेयिवस् (उप√इ+क्वसु, १.३) | having attained |
| च्युताः | च्युत (√च्यु+क्त, १.३) | fallen |
| प्रवाहात् | प्रवाह (५.१) | from the stream |
| अभितः | अभितः | all around |
| प्रसारिणः | प्रसारिन् (प्र√सृ+णिनि, १.३) | spreading |
| प्रियाङ्कशीताः | प्रिया–अङ्क–शीत (१.३) | cool like the lap of a beloved |
| शुचिमौक्तिकत्विषः | शुचि–मौक्तिक–त्विष् (१.३) | having the lustre of pure pearls |
| वनप्रहासाः | वन–प्रहास (१.३) | the loud laughter of the forest |
| इव | इव | like |
| वारिबिन्दवः | वारि–बिन्दु (१.३) | water drops |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | दू | र | पा | ते | न | भि | दा | मु | पे | यु | ष |
| श्च्यु | ताः | प्र | वा | हा | द | भि | तः | प्र | सा | रि | णः |
| प्रि | या | ङ्क | शी | ताः | शु | चि | मौ | क्ति | क | त्वि | षो |
| व | न | प्र | हा | सा | इ | व | वा | रि | बि | न्द | वः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.