आकीर्णा मुखनलिनैर्विलासिनीना-
मुद्भूतस्फुटविशदातपत्रफेना ।
सा तूर्यध्वनितगभीरमापतन्ती
भूभर्तुः शिरसि नभोनदीव रेजे ॥

अन्वयः AI विलासिनीनाम् मुखनलिनैः आकीर्णा, उद्भूतस्फुटविशदातपत्रफेना, तूर्यध्वनितगभीरम् आपतन्ती सा (ध्वजिनी) भूभर्तुः शिरसि नभोनदी इव रेजे ।
English Summary AI That army, descending upon the peak of the mountain, shone like the celestial river. It was strewn with the lotus-like faces of charming women, its foam was the clearly visible white parasols, and it moved with a deep sound of musical instruments.
सारांश AI स्त्रियों के मुख रूपी कमलों और श्वेत छत्र रूपी फेन से युक्त वह सेना, वाद्यों के गंभीर घोष के साथ पर्वत पर गिरती हुई आकाशगंगा के समान सुशोभित हुई।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) आकीर्णेति ॥ विलासिनीनांमुखनलिनैः । उपमितसमासः । आकीर्णा व्याप्ता उद्भूतान्यूर्ध्वमुत्क्षिप्तानि स्फुटान्यसंकुचितानि विशदातपत्राणि श्वेतच्छत्राणि फेना इव यस्यास्तथोक्ता तूर्यध्वनितैर्वाद्यघोषैर्गभीरं यथा यथा भूभर्तुरिन्द्रकीलस्य शिरस्यापतन्ती सा सेना नभोनदीव रेजे।
पदच्छेदः AI
आकीर्णाआकीर्ण (आ√कॄ+क्त, १.१) strewn
मुखनलिनैःमुखनलिन (३.३) with lotus-like faces
विलासिनीनाम्विलासिनी (६.३) of the charming women
उद्भूतस्फुटविशदातपत्रफेनाउद्भूतस्फुटविशदआतपत्रफेन (१.१) whose foam was the clearly visible white parasols
सातद् (१.१) that (army)
तूर्यध्वनितगभीरम्तूर्यध्वनित–गभीरम् deep with the sound of musical instruments
आपतन्तीआपतत् (आ√पत्+शतृ, १.१) descending
भूभर्तुःभूभर्तृ (६.१) of the mountain (lord of the earth)
शिरसिशिरस् (७.१) on the peak
नभोनदीवनभस्नदी (१.१)इव like the celestial river
रेजेरेजे (√राज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) shone
छन्दः प्रहर्षिणी [१३: मनजरग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३
की र्णा मु लि नै र्वि ला सि नी ना
मु द्भू स्फु वि दा त्र फे ना
सा तू र्य ध्व नि भी मा न्ती
भू र्तुः शि सि भो दी रे जे
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