दधति क्षतीः परिणतद्विरदे
मुदितालियोषिति मदस्रुतिभिः ।
अधिकां स रोधसि बबन्ध धृतिं
महते रुजन्नपि गुणाय महान् ॥
दधति क्षतीः परिणतद्विरदे
मुदितालियोषिति मदस्रुतिभिः ।
अधिकां स रोधसि बबन्ध धृतिं
महते रुजन्नपि गुणाय महान् ॥
मुदितालियोषिति मदस्रुतिभिः ।
अधिकां स रोधसि बबन्ध धृतिं
महते रुजन्नपि गुणाय महान् ॥
अन्वयः
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महान् महते रुजन् अपि गुणाय भवति । यथा परिणतद्विरदे मदस्रुतिभिः क्षतीः दधति मुदितालियोषिति रोधसि सः अधिकां धृतिं बबन्ध ।
English Summary
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A great person, even while causing pain to another great one, contributes to their virtue. Similarly, Arjuna felt great satisfaction looking at the riverbank, which, though damaged by the ichor-streams of mature elephants, delighted the female bees.
सारांश
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हाथियों के प्रहार से घायल होने पर भी पर्वत के तट ने अपनी शोभा नहीं खोई; महान व्यक्ति कष्ट सहकर भी श्रेष्ठ लक्ष्यों के लिए धैर्य और उदारता धारण किए रहते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
दधतीति । सोऽर्जुनः क्षतीः क्षतानि दधति धारयति । कुतः। परिणतास्तिर्यग्दन्तप्रहारिणो द्विरदा यस्मिंस्तस्मिन् ।
तिर्यग्दन्तप्रहारस्तु गजः परिणतो मतः इति हलायुधः । मदस्रुतिभिर्मुदितालियोषिति रोधस्यधिकां धृतिं प्रीतिं बबन्ध । निश्चलीकृतवानित्यर्थः । तथाहि । महान् रुजन्पीडयन्नपि महते गुणायोत्कर्षाय भवति । महत्कृता पीडापि शुभावहैवेत्यर्थः। तद्युक्तं गजरुग्णस्यापि रोधसःप्रीतिकरत्वमिति भावः ॥
पदच्छेदः
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| दधति | दधत् (√धा+शतृ, ७.१) | bearing |
| क्षतीः | क्षति (२.३) | damages |
| परिणतद्विरदे | परिणत (परि√नम्+क्त)–द्विरद (७.१) | on which there are mature elephants |
| मुदितालियोषिति | मुदित–अलि–योषित् (७.१) | on which the female bees are delighted |
| मदस्रुतिभिः | मद–स्रुति (३.३) | by the streams of ichor |
| अधिकां | अधिक (२.१) | great |
| स | तद् (१.१) | he |
| रोधसि | रोधस् (७.१) | on the riverbank |
| बबन्ध | बबन्ध (√बन्ध् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | felt |
| धृतिं | धृति (२.१) | satisfaction |
| महते | महत् (४.१) | for a great one |
| रुजन् | रुजत् (√रुज्+शतृ, १.१) | causing pain |
| अपि | अपि | even |
| गुणाय | गुण (४.१) | for virtue (is) |
| महान् | महत् (१.१) | a great person |
छन्दः
प्रमिताक्षरा [१२: सजसस]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | ध | ति | क्ष | तीः | प | रि | ण | त | द्वि | र | दे |
| मु | दि | ता | लि | यो | षि | ति | म | द | स्रु | ति | भिः |
| अ | धि | कां | स | रो | ध | सि | ब | ब | न्ध | धृ | तिं |
| म | ह | ते | रु | ज | न्न | पि | गु | णा | य | म | हान् |
| स | ज | स | स | ||||||||
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