महते फलाय तदवेक्ष्य शिवं
विकसन्निमित्तकुसुमं स पुरः ।
न जगाम विस्मयवशं वशिनां
न निहन्ति धैर्यमनुभावगुणः ॥
महते फलाय तदवेक्ष्य शिवं
विकसन्निमित्तकुसुमं स पुरः ।
न जगाम विस्मयवशं वशिनां
न निहन्ति धैर्यमनुभावगुणः ॥
विकसन्निमित्तकुसुमं स पुरः ।
न जगाम विस्मयवशं वशिनां
न निहन्ति धैर्यमनुभावगुणः ॥
अन्वयः
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सः पुरः महते फलाय शिवम् विकसत्-निमित्त-कुसुमम् तत् अवेक्ष्य विस्मय-वशम् न जगाम । अनुभाव-गुणः वशिनाम् धैर्यम् न निहन्ति हि ।
English Summary
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Seeing before him that auspicious sign—the blossoming of omens like flowers—portending a great result, he did not fall into astonishment. Indeed, the virtue of spiritual power does not destroy the composure of the self-controlled.
सारांश
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महान सफलता के सूचक शुभ लक्षणों को अपने सामने प्रकट होते देखकर भी अर्जुन के मन में तनिक भी अहंकार या आश्चर्य नहीं हुआ। धीर पुरुषों का धैर्य उनके महान प्रभाव और आत्मबल के कारण कभी विचलित नहीं होता।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
महत इति ॥ सोऽर्जुनो महते फलाय श्रेयसे सस्याय च विकसत्पूर्वोक्तं शिवं सुखदं तन्निमित्तमेव कुसुमं पुरोऽग्रेऽवेक्ष्य विस्मयवशं न जगाम । तथाहि । वशिनामनुभाव एव गुणः स च धैर्यं न निहन्ति । विस्मयादिविकारं न जनयतीत्यर्थः । जनने वा तपः क्षीयेत ।
तपः क्षरति विस्मयात् इति स्मरणादिति भावः॥ तदभूरिवासरकृतं सृकतैरुपलभ्य वैभवमनन्यभवम् । उपतस्थुरास्थितविषादधियः शतयज्वनो वनचरावसतिम्
पदच्छेदः
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| महते | महत् (४.१) | for a great |
| फलाय | फल (४.१) | for a result |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| अवेक्ष्य | अवेक्ष्य (अव√ईक्ष्+ल्यप्) | having seen |
| शिवम् | शिव (२.१) | auspicious |
| विकसन्निमित्तकुसुमम् | विकसत्–निमित्त–कुसुम (२.१) | the blossoming flower of good omens |
| सः | तद् (१.१) | he |
| पुरः | पुरस् | before him |
| न | न | not |
| जगाम | जगाम (√गम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did go |
| विस्मयवशम् | विस्मय–वश (२.१) | under the sway of astonishment |
| वशिनाम् | वशिन् (६.३) | of the self-controlled |
| न | न | not |
| निहन्ति | निहन्ति (नि√हन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | destroys |
| धैर्यम् | धैर्य (२.१) | the composure |
| अनुभावगुणः | अनुभाव–गुण (१.१) | The virtue of spiritual power |
छन्दः
प्रमिताक्षरा [१२: सजसस]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ह | ते | फ | ला | य | त | द | वे | क्ष्य | शि | वं |
| वि | क | स | न्नि | मि | त्त | कु | सु | मं | स | पु | रः |
| न | ज | गा | म | वि | स्म | य | व | शं | व | शि | नां |
| न | नि | ह | न्ति | धै | र्य | म | नु | भा | व | गु | णः |
| स | ज | स | स | ||||||||
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