नवपल्लवाञ्जलिभृतः प्रचये
बृहतस्तरून्गमयतावनतिम् ।
स्तृणता तृणैः प्रतिनिशं मृदुभिः
शयनीयतामुपयतीं वसुधाम् ॥
नवपल्लवाञ्जलिभृतः प्रचये
बृहतस्तरून्गमयतावनतिम् ।
स्तृणता तृणैः प्रतिनिशं मृदुभिः
शयनीयतामुपयतीं वसुधाम् ॥
बृहतस्तरून्गमयतावनतिम् ।
स्तृणता तृणैः प्रतिनिशं मृदुभिः
शयनीयतामुपयतीं वसुधाम् ॥
अन्वयः
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(सः अनुजगृहे तपसा, यत्) प्रचये बृहतः तरून् नवपल्लवाञ्जलिभृतः अवनतिम् गमयता, प्रतिनिशं मृदुभिः तृणैः शयनीयताम् उपयतीं वसुधाम् स्तृणता (च) ।
English Summary
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(He was served by his penance) by making the great trees, holding offerings of new sprouts, bow down for gathering, and by covering the earth with soft grass every night, rendering it a suitable bed.
सारांश
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तपस्या की शक्ति से विशाल वृक्ष नए पत्तों रूपी अंजलि बांधकर झुकने लगे। कोमल घास से ढकी हुई पृथ्वी अर्जुन के लिए प्रतिदिन बिछौने का रूप धारण कर अत्यंत सुखदायक बन गई।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
नवेति ॥ प्रचये पुष्पावचयप्रसङ्गे नवपल्लवा एवाञ्जलयस्तान्बिभ्रतीति तथोक्तान्बृहत उच्चांस्तरूनवनतिं नम्रतां गमयता ।
गतिबुद्धि— (अष्टाध्यायी १.४.५२ ) इत्यादिना तरूणां कर्मत्वम् । प्रतिनिशं निशि निशि शयनीयतामुपयतीम् । शयनस्थानभूतामित्यर्थः । वसुधां मृदुभिस्तृणैः स्तुणताच्छादयता।
पदच्छेदः
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| नवपल्लवाञ्जलिभृतः | नवपल्लव–अञ्जलि–भृत् (२.३) | holding offerings of new sprouts |
| प्रचये | प्रचय (७.१) | for gathering |
| बृहतः | बृहत् (२.३) | great |
| तरून् | तरु (२.३) | trees |
| गमयता | गमयत् (√गम्+णिच्+शतृ, ३.१) | by (it) causing to go |
| अवनतिम् | अवनति (२.१) | to a state of bowing |
| स्तृणता | स्तृणत् (√स्तॄ+शतृ, ३.१) | by (it) covering |
| तृणैः | तृण (३.३) | with grass |
| प्रतिनिशम् | प्रतिनिशम् | every night |
| मृदुभिः | मृदु (३.३) | soft |
| शयनीयताम् | शयनीयता (२.१) | the state of being a bed |
| उपयतीम् | उपयत् (उप√इ+शतृ, २.१) | attaining |
| वसुधाम् | वसुधा (२.१) | the earth |
छन्दः
प्रमिताक्षरा [१२: सजसस]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | व | प | ल्ल | वा | ञ्ज | लि | भृ | तः | प्र | च | ये |
| बृ | ह | त | स्त | रू | न्ग | म | य | ता | व | न | तिम् |
| स्तृ | ण | ता | तृ | णैः | प्र | ति | नि | शं | मृ | दु | भिः |
| श | य | नी | य | ता | मु | प | य | तीं | व | सु | धाम् |
| स | ज | स | स | ||||||||
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