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शिरसा हरिन्मणिनिभः स वह-
न्कृतजन्मनोऽभिषवणेन जटाः ।
उपमां ययावरुणदीधितिभिः
परिमृष्टमूर्धनि तमालतरौ ॥

अन्वयः AI सः हरिन्मणिनिभः अभिषवणेन कृतजन्मनः जटाः शिरसा वहन्, अरुणदीधितिभिः परिमृष्टमूर्धनि तमालतरौ उपमाम् ययौ ।
English Summary AI He, resembling an emerald and carrying on his head matted locks grown from ritual bathing, attained the likeness of a Tamala tree whose top is caressed by the rays of the rising sun.
सारांश AI स्नान के उपरांत अपनी जटाओं को सिर पर धारण किए हुए अर्जुन, नीलमणि के समान श्यामल कांति वाले थे। वे ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो उदीयमान सूर्य की लाल किरणों से आलोकित कोई विशाल तमाल का वृक्ष हो।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) शिरसेति ॥ हरिन्मणिनिभो मरकतमणिश्यामोऽभिषवणेन स्नानेन कृतजन्मनो जनिताः। अतः पिशङ्गीरिति भावः। जटाः शिरसा वहन्सोऽर्जुनोऽरुणस्यानूरोर्दीधितिभिः परिमृष्टमूर्धनि व्याप्तशिरसि तमालतरावुपमां तमालतरोः सादृश्यं ययावित्यार्थीयमुपमा । तरोरौपम्याधिकरणत्वात्तदपेक्षया सप्तमी ॥
पदच्छेदः AI
शिरसाशिरस् (३.१) on his head
हरिन्मणिनिभःहरिन्मणिनिभ (१.१) resembling an emerald
सःतद् (१.१) he
वहन्वहत् (√वह्+शतृ, १.१) carrying
कृतजन्मनःकृतजन्मन् (२.३) which had grown
अभिषवणेनअभिषवण (३.१) due to ritual bathing
जटाःजटा (२.३) matted locks
उपमाम्उपमा (२.१) the likeness
ययौययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) attained
अरुणदीधितिभिःअरुणदीधिति (३.३) by the rays of the rising sun
परिमृष्टमूर्धनिपरिमृष्ट (परि√मृज्+क्त)मूर्धन् (७.१) whose top is caressed
तमालतरौतमालतरु (७.१) of a Tamala tree
छन्दः प्रमिताक्षरा [१२: सजसस]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
शि सा रि न्म णि नि भः
न्कृ न्म नो ऽभि णे टाः
मां या रु दी धि ति भिः
रि मृ ष्ट मू र्ध नि मा रौ
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