अन्वयः
AI
सः प्रयतः मनसा जपैः प्रणतिभिः दिवः अधिपतिम् समुपेयिवान् (सन्) सहजेतरे जयशमौ दधती महसी युगपत् बिभरांबभूव ।
English Summary
AI
That devout one (Arjuna), having approached the lord of heaven (Indra) through mind, prayers, and prostrations, simultaneously bore two acquired splendors—victory and tranquility—which themselves brought about conquest and peace.
सारांश
AI
मन, मंत्र-जप और प्रणाम के द्वारा संयमित अर्जुन ने स्वर्ग के स्वामी इंद्र का ध्यान किया। उस समय उनके व्यक्तित्व में विजय का ओज और शांति का सौम्य तेज, ये दो विरोधी गुण एक साथ सुशोभित हो रहे थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
मनसेति ॥ प्रयतोऽहिंसादिनिरतो मनसा ध्यानेन जपैर्विशिष्टमन्त्राभ्यासै: प्रणतिमिर्नमस्कारैः । एवं मनोवाक्कायकर्मभिर्दिवोऽधिपतिमिन्द्रं समुपेयिवानुपसेदिवान्सोऽर्जुनः सहजेतरौ नैसर्गिकागन्तुको । जीयतेऽनेनेति जयो वीररसः ।
एरच् (अष्टाध्यायी ३.३.५६ ) इत्यच् । शम्यतेऽनेनेति शमः। जयशमौ वीरशान्तिरसौ दधती पुष्णती महसी तेजसी युगपद्धिभरांबभूव बभार । भीह्रीभृहुवाम्- इति विकल्पादाम्प्रत्ययः । अत्र युगपद्वीरशान्ताधिकरणत्वाभिधानादस्य लोकाद्भुतमहिमत्वं व्यज्यते ॥
पदच्छेदः
AI
| मनसा | मनस् (३.१) | with his mind |
| जपैः | जप (३.३) | with prayers |
| प्रणतिभिः | प्रणति (३.३) | with prostrations |
| प्रयतः | प्रयत (१.१) | devout |
| समुपेयिवान् | समुपेयिवस् (सम्+उप√इ+क्वसु, १.१) | having approached |
| अधिपतिम् | अधिपति (२.१) | the lord |
| सः | तद् (१.१) | he |
| दिवः | दिव् (६.१) | of heaven |
| सहजेतरे | सहज–इतर (१.२) | acquired (not innate) |
| जयशमौ | जय–शम (२.२) | victory and tranquility |
| दधती | दधत् (√धा+शतृ, १.२) | bearing |
| बिभरांबभूव | बिभरांबभूव (√भृ +आम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bore |
| युगपत् | युगपत् | simultaneously |
| महसी | महस् (२.२) | two splendors |
छन्दः
प्रमिताक्षरा [१२: सजसस]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | न | सा | ज | पैः | प्र | ण | ति | भिः | प्र | य | तः |
| स | मु | पे | यि | वा | न | धि | प | तिं | स | दि | वः |
| स | ह | जे | त | रे | ज | य | श | मौ | द | ध | ती |
| बि | भ | रां | ब | भू | व | यु | ग | प | न्म | ह | सी |
| स | ज | स | स | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.