अन्वयः
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पृथुकदम्बकदम्बकराजितम्, ग्रहितमालतमालवनाकुलम्, लघुतुषारतुषारजलश्च्युतम्, धृतसदानसदाननदन्तिनम् (हिमाचलम्)।
English Summary
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(He approached the Himalaya) which was adorned with clusters of large Kadamba trees, filled with intertwined Malati and Tamala forests, shedding light dew and snow-water, and home to elephants with auspicious faces and flowing ichor.
सारांश
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कदम्ब और तमाल के सघन वनों से युक्त वह पर्वत मदमस्त हाथियों के विचरण और ओस की शीतल बूंदों के गिरने से अत्यंत मनोहारी लग रहा था।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
पृथ्विति ॥ पुनश्च । पृथुभिः कदम्बतां कदम्बकैर्नीपकुसुमसमूहै राजितम् ।
कदम्बमाहुः सिद्धार्थे नीपे च निकुरम्बके इत्युभयत्रापि विश्वः । प्रथितमालैर्बद्धपङ्क्तिभिस्तमालवनैस्तापिञ्छवनैराकुलमाकीर्णम्। कालस्कन्धस्तमालः स्यात्तापिञ्छोऽपि इत्यमरः (अमरकोशः २.४.६८ ) । लघुतुषारमल्पशीकरं यत्तुषारजलं हिमोदकं श्च्योतति वर्षति तं तथोक्तम् । तुषारौ हिमसीकरौ इति शाश्वतः । अन्येभ्योऽपि दृश्यते (अष्टाध्यायी ३.२.१७८ ) इति क्विप् । सदानाः समदाः सदाननाः शोभनाननाश्च ये दन्तिनस्ते धृता येन तं तथोक्तम् ॥
पदच्छेदः
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| पृथुकदम्बकदम्बकराजितं | पृथु–कदम्ब–कदम्बक–राजित (२.१) | adorned with clusters of large Kadamba trees |
| ग्रहितमालतमालवनाकुलम् | ग्रहित–माल–तमाल–वन–आकुल (२.१) | filled with intertwined Malati and Tamala forests |
| लघुतुषारतुषारजलश्च्युतं | लघु–तुषार–तुषार–जल–श्च्युत (२.१) | shedding light dew and snow-water |
| धृतसदानसदाननदन्तिनम् | धृत–सदान–सदानन–दन्तिन् (२.१) | home to elephants with auspicious faces and flowing ichor |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पृ | थु | क | द | म्ब | क | द | म्ब | क | रा | जि | तं |
| ग्र | हि | त | मा | ल | त | मा | ल | व | ना | कु | लम् |
| ल | घु | तु | षा | र | तु | षा | र | ज | ल | श्च्यु | तं |
| धृ | त | स | दा | न | स | दा | न | न | द | न्ति | नम् |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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