अन्वयः
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मणिमयूखचयांशुकभासुराः, सुरवधूपरिभुक्तलतागृहाः, उच्चशिलान्तरगोपुराः, उदितपुष्पवनाः भुवः पुरः इव दधतम् (हिमाचलम्)।
English Summary
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(He approached the Himalaya) which held regions that were like cities: radiant with garments made from the collection of gem-rays, having creeper-bowers enjoyed by celestial nymphs, possessing high rocks as their inner gates, and featuring gardens with blooming flowers.
सारांश
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मणियों की किरणों से जगमगाते लता-गृहों और ऊँची शिलाओं रूपी द्वारों से युक्त वह पर्वत भूमि खिले हुए फूलों वाले उपवनों से सुसज्जित किसी नगर के समान लग रही थी।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
मणीति ॥ पुनः। मणिमयूखचया अंशुकानीव पटकादीनीव तैर्भासुराः । सुरवधूभिः परिभुक्ता लता गृहा इव यासु तास्तथोक्ताः । उच्चानि शिलान्तराणि गोपुराणीव शिलान्तराणि शिलामध्यानि पुरद्वाराणि यासु ताः । उदितान्यूर्जितानि पुष्पाणां वनानि यासु ताः । अतएव पुर इव नगराणीव स्थिताः। भुवो दधतम् ॥
पदच्छेदः
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| मणिमयूखचयांशुकभासुराः | मणि–मयूख–चय–अंशुक–भासुर (१.३) | radiant with garments made from the collection of gem-rays |
| सुरवधूपरिभुक्तलतागृहाः | सुर–वधू–परिभुक्त–लता–गृह (१.३) | having creeper-bowers enjoyed by celestial nymphs |
| दधतम् | दधत् (√धा+शतृ, २.१) | holding |
| उच्चशिलान्तरगोपुराः | उच्च–शिला–अन्तर–गोपुर (१.३) | possessing high rocks as their inner gates |
| पुरः | पुर (२.३) | cities |
| इव | इव | like |
| उदितपुष्पवनाः | उदित–पुष्प–वन (१.३) | having gardens with blooming flowers |
| भुवः | भू (२.३) | regions |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | णि | म | यू | ख | च | यां | शु | क | भा | सु | राः |
| सु | र | व | धू | प | रि | भु | क्त | ल | ता | गृ | हाः |
| द | ध | त | मु | च्च | शि | ला | न्त | र | गो | पु | राः |
| पु | र | इ | वो | दि | त | पु | ष्प | व | ना | भु | वः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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