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स्नपितनवलतातरुप्रवालै-
रमृतलवस्रुतिशालिभिर्मयूखैः ।
सततमसितयामिनीषु शम्भो
अमलयतीह वनान्तमिन्दुलेखा ॥

अन्वयः AI इह शम्भोः इन्दुलेखा अमृतलवस्रुतिशालिभिः स्नपितनवलतातरुप्रवालैः मयूखैः असितयामिनीषु सततं वनान्तम् अमलयति।
English Summary AI Here, on dark nights, the crescent moon on Shiva's head constantly purifies the forest region with its rays. These rays, which flow with drops of nectar, seem to bathe the fresh sprouts of the creepers and trees.
सारांश AI भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित चन्द्रलेखा अपनी अमृतमयी किरणों से नवीन लताओं और कोपलों को सींचती हुई अंधेरी रातों में भी यहाँ के वन प्रदेश को प्रकाशित करती रहती है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) स्नपितेति ॥ इहाद्रौ शंभोरिन्दुलेखा । स्वपितानि सिक्तानि नवानि लतानां तरूणां च प्रवालानि यैस्तैः । अमृतलवस्रुत्यामृतबिन्दुनिःस्यन्देन शालन्ते ये तैर्मयूखैः सततं सर्वकालमसितयामिनीषु कृष्णपक्षरात्रिष्वपि वनान्तममलयति धवलयति । अन्यत्र नैतदस्तीति व्यतिरेको व्यज्यते ॥
पदच्छेदः AI
स्नपितनवलतातरुप्रवालैःस्नपित (√स्नप्+णिच्+क्त)–नवलतातरुप्रवाल (३.३) which have bathed the fresh sprouts of creepers and trees
अमृतलवस्रुतिशालिभिःअमृतलवस्रुतिशालिन् (३.३) possessing the flow of nectar-drops
मयूखैःमयूख (३.३) with rays
सततम्सततम् always
असितयामिनीषुअसितयामिनी (७.३) on dark nights
शम्भोःशम्भु (६.१) of Shambhu (Shiva)
अमलयतिअमलयति (√अमलय कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) makes pure/white
इहइह here
वनान्तम्वनान्त (२.१) the forest region
इन्दुलेखाइन्दुलेखा (१.१) the crescent moon
छन्दः पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३
स्न पि ता रु प्र वा लै
मृ स्रु ति शा लि भि र्म यू खैः
सि या मि नी षु म्भो
ती ना न्त मि न्दु ले खा
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