दधत इव विलासशालि नृत्यं
मृदु पतता पवनेन कम्पितानि ।
इह ललितविलासिनीजनभ्रू-
गतिकुटिलेषु पयःसु पङ्कजानि ॥
दधत इव विलासशालि नृत्यं
मृदु पतता पवनेन कम्पितानि ।
इह ललितविलासिनीजनभ्रू-
गतिकुटिलेषु पयःसु पङ्कजानि ॥
मृदु पतता पवनेन कम्पितानि ।
इह ललितविलासिनीजनभ्रू-
गतिकुटिलेषु पयःसु पङ्कजानि ॥
अन्वयः
AI
इह मृदु पतता पवनेन कम्पितानि पङ्कजानि ललितविलासिनीजनभ्रूगतिकुटिलेषु पयःसु विलासशालि नृत्यं दधते इव।
English Summary
AI
Here, the lotuses, shaken by the gently blowing wind, seem to perform a graceful dance in the waters, whose ripples are as captivating as the movements of the eyebrows of charming, playful women.
सारांश
AI
मंद पवन से कंपित यहाँ के कमलों की चंचलता ऐसी जान पड़ती है मानो वे सुंदर स्त्रियों की भौंहों के समान टेढ़ी गति वाला कोई विलासपूर्ण नृत्य कर रहे हों।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
दधत इति ॥ इहाद्रौ मृदु पतता मन्दं वहता पवनेन कम्पितानि पङ्कजानि ललितविलासिनीजनस्य भ्रूगतिवत्कुटिलेषु । ईषत्तरङ्गितेष्वित्यर्थः । पयःसु विलासशालि नृत्यं दधत इव । सविलासं नृत्यन्तीवेत्युत्प्रेक्षा । पुष्पिताग्रावृत्तम् ॥
पदच्छेदः
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| दधते | दधते (√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they perform |
| इव | इव | as if |
| विलासशालि | विलास–शालिन् (२.१) | graceful |
| नृत्यम् | नृत्य (२.१) | a dance |
| मृदु | मृदु | gently |
| पतता | पतत् (√पत्+शतृ, ३.१) | blowing |
| पवनेन | पवन (३.१) | by the wind |
| कम्पितानि | कम्पित (√कम्प्+णिच्+क्त, १.३) | shaken |
| इह | इह | here |
| ललितविलासिनीजनभ्रूगतिकुटिलेषु | ललित–विलासिनी–जन–भ्रू–गति–कुटिल (७.३) | in the waters, rippled like the graceful movements of the eyebrows of charming women |
| पयःसु | पयस् (७.३) | in the waters |
| पङ्कजानि | पङ्कज (१.३) | the lotuses |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | ध | त | इ | व | वि | ला | स | शा | लि | नृ | त्यं | |
| मृ | दु | प | त | ता | प | व | ने | न | क | म्पि | ता | नि |
| इ | ह | ल | लि | त | वि | ला | सि | नी | ज | न | भ्रू | |
| ग | ति | कु | टि | ले | षु | प | यः | सु | प | ङ्क | जा | नि |
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