अन्वयः
AI
(कलमस्य गोपिकाम्) परितः महा-निवेशौ पयोधरौ मुहुः आहितम्, सर्पता परिश्रम-अम्भः-पुलकेन नव-आतप-लोहितम् अरविन्दजम् रजः चकासयन्तीम् (निरीक्ष्य...)
English Summary
AI
(Continuing the description) ...who was making the lotus pollen shine, which was reddened by the morning sun, applied repeatedly around her large breasts, and spreading with the perspiration from her exertion.
सारांश
AI
पसीने और रोमांच के कारण स्तनों पर फैले लाल कमल-पराग को बिखेरती हुई गोपी प्रातःकालीन धूप की लालिमा के समान चमक रही थी।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
नवेति ॥ महान्निवेशः स्थानं ययोस्तौ महानिवेशौ । पीवरावित्यर्थः । पयोधरौ परितः । स्तनयोः समन्तादित्यर्थः ।
अभितःपरितःसमयानिकषाहाप्रतियोगेऽपि इति द्वितीया । मुहुराहितं नवातपालोहितं बालातपताम्रमरविन्दजं रंजः परागं सर्पता प्रसरता परिश्रमाम्मःपुलकेन स्वेदोद्भेदेन चकासयन्तीं शोभयन्तीम् । चकास्तेर्ण्यन्ताच्छतरि ङीप् । अलंकरणं कुर्वतीम् । तत्रापि विकृततेति भावः ॥
पदच्छेदः
AI
| नवातपालोहितम् | नव–आतप–लोहित (२.१) | reddened by the morning sun |
| आहितम् | आहित (आ√धा+क्त, २.१) | applied |
| मुहुः | मुहुस् | repeatedly |
| महानिवेशौ | महा–निवेश (२.२) | large-based |
| परितः | परितस् | around |
| पयोधरौ | पयोधर (२.२) | the two breasts |
| चकासयन्तीम् | चकासयन्ती (√चकास्+णिच्+शतृ, २.१) | making shine |
| अरविन्दजम् | अरविन्दज (२.१) | lotus-born |
| रजः | रजस् (२.१) | pollen |
| परिश्रमाम्भःपुलकेन | परिश्रम–अम्भस्–पुलक (३.१) | with the perspiration from exertion |
| सर्पता | सर्पत् (√सृप्+शतृ, ३.१) | spreading |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | वा | त | पा | लो | हि | त | मा | हि | तं | मु | हु |
| र्म | हा | नि | वे | शौ | प | रि | तः | प | यो | ध | रौ |
| च | का | स | य | न्ती | म | र | वि | न्द | जं | र | जः |
| प | रि | श्र | मा | म्भः | पु | ल | के | न | स | र्प | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.