निरीक्ष्यमाणा इव विस्मयाकुलैः
पयोभिरुन्मीलितपद्मलोचनैः ।
हृतप्रियादृष्टिविलासविभ्रमा
मनोऽस्य जह्रुः शफरीविवृत्तयः ॥
निरीक्ष्यमाणा इव विस्मयाकुलैः
पयोभिरुन्मीलितपद्मलोचनैः ।
हृतप्रियादृष्टिविलासविभ्रमा
मनोऽस्य जह्रुः शफरीविवृत्तयः ॥
पयोभिरुन्मीलितपद्मलोचनैः ।
हृतप्रियादृष्टिविलासविभ्रमा
मनोऽस्य जह्रुः शफरीविवृत्तयः ॥
अन्वयः
AI
विस्मय-आकुलैः उन्मीलित-पद्म-लोचनैः पयोभिः निरीक्ष्यमाणाः इव, हृत-प्रिया-दृष्टि-विलास-विभ्रमाः शफरी-विवृत्तयः अस्य मनः जह्रुः ।
English Summary
AI
The darting movements of the shafari fish, which imitated the playful, graceful glances of his beloved, captured his mind. It was as if they were being watched by the waters with wonder-filled, opened lotus-eyes.
सारांश
AI
खिले कमलों जैसे नेत्रों वाले जल और विस्मयकारी चंचल मछलियों की थिरकन ने अर्जुन का मन मोह लिया, जो प्रेमिकाओं के कटाक्षों जैसी सुंदर थीं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
निरीक्ष्यमाणा इति ॥ विस्मयाकुलैराश्चर्यरसाविष्टैरतएवोन्मीलितानि पद्मान्येव लोचनानि येषां तैः पयोभिरम्भोभिर्निरीक्ष्यमाणा इव स्थिताः । हृतः प्रियादृष्टिविलासानां विभ्रमः शोभा याभिस्तास्तथोक्ता इति मनोहरणे हेतूक्तिः ।
विभ्रमः संशये भ्रान्तौ शोभायां च इति वैजयन्ती । शफरीविवृत्तयो मत्सीस्फुरितान्यस्यार्जुनस्य मनो जह्वु: ॥ तुतोष पश्यन्कलमस्य सोऽधिकं सवारिजे वारिणि रामणीयकम्। सुदुर्लभे नार्हति कोऽभिनन्दितुं प्रकर्षलक्ष्मीमनुरूपसंगमे
पदच्छेदः
AI
| निरीक्ष्यमाणाः | निरीक्ष्यमाण (निर्√ईक्ष्+यक्+शानच्, १.३) | being watched |
| इव | इव | as if |
| विस्मयाकुलैः | विस्मय–आकुल (३.३) | filled with wonder |
| पयोभिः | पयस् (३.३) | by the waters |
| उन्मीलितपद्मलोचनैः | उन्मीलित (उद्√मील्+क्त)–पद्म–लोचन (३.३) | with opened lotus-eyes |
| हृतप्रियादृष्टिविलासविभ्रमाः | हृत (√हृ+क्त)–प्रिया–दृष्टि–विलास–विभ्रम (१.३) | which stole the playful, graceful glances of his beloved |
| मनः | मनस् (२.१) | mind |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| जह्रुः | जह्रुः (√हृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | captured |
| शफरीविवृत्तयः | शफरी–विवृत्ति (१.३) | the darting movements of the shafari fish |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | री | क्ष्य | मा | णा | इ | व | वि | स्म | या | कु | लैः |
| प | यो | भि | रु | न्मी | लि | त | प | द्म | लो | च | नैः |
| हृ | त | प्रि | या | दृ | ष्टि | वि | ला | स | वि | भ्र | मा |
| म | नो | ऽस्य | ज | ह्रुः | श | फ | री | वि | वृ | त्त | यः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.