पपात पूर्वां जहतो विजिह्मतां
वृषोपभुक्तान्तिकसस्यसम्पदः ।
रथाङ्गसीमन्तितसान्द्रकर्दमा-
न्प्रसक्तसम्पातपृथक्कृतान्पथः ॥
पपात पूर्वां जहतो विजिह्मतां
वृषोपभुक्तान्तिकसस्यसम्पदः ।
रथाङ्गसीमन्तितसान्द्रकर्दमा-
न्प्रसक्तसम्पातपृथक्कृतान्पथः ॥
वृषोपभुक्तान्तिकसस्यसम्पदः ।
रथाङ्गसीमन्तितसान्द्रकर्दमा-
न्प्रसक्तसम्पातपृथक्कृतान्पथः ॥
अन्वयः
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(तस्य दृष्टिः) पूर्वाम् विजिह्मतां जहतः, वृषोपभुक्तान्तिकसस्यसम्पदः, रथाङ्गसीमन्तितसान्द्रकर्दमान्, प्रसक्तसम्पातपृथक्कृतान् पथः पपात।
English Summary
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His gaze fell upon the paths, which were losing their former crookedness, had crops near them eaten by bulls, had their thick mud parted by chariot wheels, and were separated by constant traffic.
सारांश
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पहियों से कटी कीचड़, पशुओं द्वारा चरी गई घास और अब सीधे व सुगम हो चुके रास्तों को अर्जुन ने ध्यान से देखा।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
पपातेति ॥ सोऽर्जुनः पूर्वां प्रावृषेण्यां विजिह्मनां वक्रतां जहतस्त्यजतः। शरदि निष्पङ्कत्वेन समरेखयैव सुगमत्वादिति भावः । जहातेः शतृप्रत्ययः । वृषोपभुक्तान्तिकसस्यसंपदो वृषभचर्वितप्रान्तसस्यसमृद्धीन् ।
सुकृते वृषभे वृषः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२३३ ) । सीमन्ता इव सीमन्ताश्चकाङ्गपद्धतयः सीमन्तवन्तः कृताः सीमन्तिताः । मत्वन्तात् तत्करोति-इति णिचि क्तः। णाविष्ठवद्भावान्मतुपो लुक् । रथाङ्गैश्चक्रै: सीमन्तिताः सान्द्राः कर्दमा घनीभूताः पङ्का येषु तान्प्रसक्तसंपातेन संततसंचारेण पृथक्कृतान्पथो मार्गान्पपात जगामेति स्वभावोक्तिः ॥
पदच्छेदः
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| पपात | पपात (√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | fell |
| पूर्वाम् | पूर्व (२.१) | former |
| जहतः | जहत् (√हा+शतृ, २.३) | losing |
| विजिह्मताम् | विजिह्मता (२.१) | crookedness |
| वृषोपभुक्तान्तिकसस्यसम्पदः | वृष–उपभुक्त–अन्तिक–सस्य–सम्पद् (२.३) | with crops nearby eaten by bulls |
| रथाङ्गसीमन्तितसान्द्रकर्दमान् | रथ–अङ्ग–सीमन्तित–सान्द्र–कर्दम (२.३) | with thick mud parted by chariot wheels |
| प्रसक्तसम्पातपृथक्कृतान् | प्रसक्त–सम्पात–पृथक्–कृत (२.३) | separated by constant traffic |
| पथः | पथिन् (२.३) | upon the paths |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | पा | त | पू | र्वां | ज | ह | तो | वि | जि | ह्म | तां |
| वृ | षो | प | भु | क्ता | न्ति | क | स | स्य | स | म्प | दः |
| र | था | ङ्ग | सी | म | न्ति | त | सा | न्द्र | क | र्द | मा |
| न्प्र | स | क्त | स | म्पा | त | पृ | थ | क्कृ | ता | न्प | थः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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