परीतमुक्षावजये जयश्रिया
नदन्तमुच्चैः क्षतसिन्धुरोधसम् ।
ददर्श पुष्टिं दधतं स शारदीं
सविग्रहं दर्पमिवाधिपं गवाम् ॥
परीतमुक्षावजये जयश्रिया
नदन्तमुच्चैः क्षतसिन्धुरोधसम् ।
ददर्श पुष्टिं दधतं स शारदीं
सविग्रहं दर्पमिवाधिपं गवाम् ॥
नदन्तमुच्चैः क्षतसिन्धुरोधसम् ।
ददर्श पुष्टिं दधतं स शारदीं
सविग्रहं दर्पमिवाधिपं गवाम् ॥
अन्वयः
AI
सः उक्षावजये जयश्रिया परीतम्, उच्चैः नदन्तम्, क्षतसिन्धुरोधसम्, शारदीम् पुष्टिम् दधतम्, सविग्रहम् दर्पम् इव गवाम् अधिपम् ददर्श।
English Summary
AI
He (Arjuna) saw the lord of the herd (a bull), who was surrounded by the glory of victory in conquering other bulls, roaring loudly, having broken the riverbanks, possessing autumnal strength, and appearing like pride personified.
सारांश
AI
अन्य साँड़ों को जीतकर विजयश्री से युक्त और डकारते हुए पुष्ट शरीर वाले श्रेष्ठ साँड़ को अर्जुन ने साक्षात अहंकार के रूप में देखा।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
परीतमिति ॥ सोऽर्जुनः उक्षावजय उक्षान्तरभङ्गे सति जयश्रिया परीतं वेष्टितमुच्चैर्नदन्तं क्षस्तसिन्धुरोधसं रुग्णसरित्तटं शरदि भवां शारदीं पुष्टिमवयवोमचयं दधतं गवामधिपं महोक्षं सविग्रहं मूर्तिमन्तम् ।
कायो देहः क्लीबपुंसौ शरीरं वर्ष्म विग्रहः इत्यमरः (अमरकोशः २.६.७२ ) । दर्पमिवेत्युत्प्रेक्षा। ददर्श ॥
पदच्छेदः
AI
| परीतम् | परीत (परि√इ+क्त, २.१) | surrounded |
| उक्षावजये | उक्षन्–अवजय (७.१) | in the conquest of bulls |
| जयश्रिया | जय–श्री (३.१) | by the glory of victory |
| नदन्तम् | नदत् (√नद्+शतृ, २.१) | roaring |
| उच्चैः | उच्चैस् | loudly |
| क्षतसिन्धुरोधसम् | क्षत–सिन्धु–रोधस् (२.१) | who has broken the riverbanks |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | saw |
| पुष्टिम् | पुष्टि (२.१) | strength |
| दधतम् | दधत् (√धा+शतृ, २.१) | possessing |
| सः | तद् (१.१) | He |
| शारदीम् | शारदी (२.१) | autumnal |
| सविग्रहम् | विग्रह–सहित (२.१) | embodied |
| दर्पम् | दर्प (२.१) | pride |
| इव | इव | like |
| अधिपम् | अधिप (२.१) | the lord |
| गवाम् | गो (६.३) | of the cows |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | री | त | मु | क्षा | व | ज | ये | ज | य | श्रि | या |
| न | द | न्त | मु | च्चैः | क्ष | त | सि | न्धु | रो | ध | सम् |
| द | द | र्श | पु | ष्टिं | द | ध | तं | स | शा | र | दीं |
| स | वि | ग्र | हं | द | र्प | मि | वा | धि | पं | ग | वाम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.