श्च्योतन्मयूखेऽपि हिमद्युतौ मे
ननिर्वृतं निर्वृतिमेति चक्षुः ।
समुज्झितज्ञातिवियोगखेदं
त्वत्संनिधावुच्छ्वसतीव चेतः ॥
श्च्योतन्मयूखेऽपि हिमद्युतौ मे
ननिर्वृतं निर्वृतिमेति चक्षुः ।
समुज्झितज्ञातिवियोगखेदं
त्वत्संनिधावुच्छ्वसतीव चेतः ॥
ननिर्वृतं निर्वृतिमेति चक्षुः ।
समुज्झितज्ञातिवियोगखेदं
त्वत्संनिधावुच्छ्वसतीव चेतः ॥
अन्वयः
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हिमद्युतौ श्च्योतत्-मयूखे अपि मे चक्षुः न निर्वृतं (सत्) निर्वृतिं न एति । त्वत्-संनिधौ (तु) चेतः समुज्झित-ज्ञाति-वियोग-खेदम् (सत्) उच्छ्वसति इव ।
English Summary
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Even when looking at the moon with its nectar-dripping rays, my eye, unsatisfied, does not find true bliss. But in your presence, my heart, having cast off the sorrow of separation from my kinsmen, feels as if it is revived.
सारांश
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चन्द्रमा की शीतल किरणों से भी मेरे नेत्रों को वह सुख नहीं मिला जो आपके दर्शन से प्राप्त हुआ है। आपके सान्निध्य में मेरा मन बन्धु-बान्धवों के वियोग का दुःख भूलकर चैन की साँस ले रहा है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
श्च्योतदिति ॥ हे भगवन् , श्च्योतन्मयूखे सुधास्त्राविकरे हिमधुताविन्दावपि विषये निर्वृतम् । नञर्थस्य नशब्दस्य सुप्सुपेति समासः । मे चक्षुस्त्वत्सन्निधौ निर्वृतिमेति। तथा चेतश्च समुज्झितज्ञातिवियोगखेदं त्यक्तबन्धुविरहदुःखं समुच्छ्वसतीतुपरोधेन प्राणितीवेत्युत्प्रेक्षा । पूर्वार्धे तु निर्वृतिकारणे सत्यपीन्दावनिर्वृतिकथनापोक्तिः । तदुक्तम्-
तत्सामग्र्यामनिर्वृत्तिर्विशेषोक्तिर्निगद्यते इति ॥
पदच्छेदः
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| श्च्योतन्मयूखे | श्च्युतत्–मयूख (७.१) | in the one with dripping rays |
| अपि | अपि | even |
| हिमद्युतौ | हिमद्युति (७.१) | in the moon |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| ननिर्वृतं | न–निर्वृत (१.१) | not pleased |
| निर्वृतिम् | निर्वृति (२.१) | bliss |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| चक्षुः | चक्षुस् (१.१) | eye |
| समुज्झितज्ञातिवियोगखेदं | समुज्झित–ज्ञाति–वियोग–खेद (१.१) | which has cast off the sorrow of separation from kinsmen |
| त्वत्संनिधौ | त्वद्–संनिधि (७.१) | in your presence |
| उच्छ्वसति | उच्छ्वसति (उद्√श्वस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is revived |
| इव | इव | as if |
| चेतः | चेतस् (१.१) | my heart |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्च्यो | त | न्म | यू | खे | ऽपि | हि | म | द्यु | तौ | मे |
| न | नि | र्वृ | तं | नि | र्वृ | ति | मे | ति | च | क्षुः |
| स | मु | ज्झि | त | ज्ञा | ति | वि | यो | ग | खे | दं |
| त्व | त्सं | नि | धा | वु | च्छ्व | स | ती | व | चे | तः |
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