उदीरितां तामिति याज्ञसेन्या
नवीकृतोद्ग्राहितविप्रकाराम् ।
आसाद्य वाचं स भृशं दिदीपे
काष्ठामुदीचीमिव तिग्मरश्मिः ॥
उदीरितां तामिति याज्ञसेन्या
नवीकृतोद्ग्राहितविप्रकाराम् ।
आसाद्य वाचं स भृशं दिदीपे
काष्ठामुदीचीमिव तिग्मरश्मिः ॥
नवीकृतोद्ग्राहितविप्रकाराम् ।
आसाद्य वाचं स भृशं दिदीपे
काष्ठामुदीचीमिव तिग्मरश्मिः ॥
अन्वयः
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इति याज्ञसेन्याः उदीरिताम्, नवीकृत-उद्ग्राहित-विप्रकाराम् ताम् वाचम् आसाद्य सः, तिग्मरश्मिः उदीचीम् काष्ठाम् इव, भृशम् दिदीपे ।
English Summary
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Having received that speech from Draupadi, which was thus spoken and which brought to mind the renewed memory of their insults, he (Arjuna) shone brightly, like the sun illuminating the northern direction.
सारांश
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द्रौपदी के ओजस्वी वचनों को सुनकर, जिन्होंने अपमान की स्मृतियों को प्रज्वलित कर दिया था, अर्जुन क्रोध से वैसे ही तपने लगे जैसे उत्तरायण में सूर्य तपता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
उदीरितामिति । सोऽर्जुन इतीत्थं यज्ञसेनस्यापत्येन स्त्रिया याज्ञसेन्यां द्रौपद्योदीरितामुक्ताम् । नवीकृतः पुनरुद्धाटनेन तथा प्रत्यायितोऽतएवोद्ग्राहितो मनसि निधापितश्च विप्रकारः परिभवो यया सा तां वाचमासाद्य । आकर्ण्येत्यर्थः । उदीचीं काष्ठां दिशम् ।
दिशस्तु ककुभः काष्ठा आशाश्च हरितश्च ताः इत्यमरः (अमरकोशः १.३.१ ) । तिग्मरश्मिरिव । भृशं दिदीपे जज्वाल । चुक्रोधेत्यर्थः ॥
पदच्छेदः
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| उदीरिताम् | उदीरित (उद्√ईर्+क्त, २.१) | spoken |
| ताम् | तद् (२.१) | that |
| इति | इति | thus |
| याज्ञसेन्याः | याज्ञसेनी (६.१) | of Draupadi |
| नवीकृतोद्ग्राहितविप्रकाराम् | नवीकृत–उद्ग्राहित (उद्√ग्रह्+णिच्+क्त)–विप्रकार (२.१) | which brought to mind the renewed memory of insults |
| आसाद्य | आसाद्य (आ√सद्+ल्यप्) | having received |
| वाचम् | वाच् (२.१) | speech |
| सः | तद् (१.१) | he |
| भृशम् | भृशम् | greatly |
| दिदीपे | दिदीपे (√दीप् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | shone |
| काष्ठाम् | काष्ठा (२.१) | direction |
| उदीचीम् | उदीची (२.१) | northern |
| इव | इव | like |
| तिग्मरश्मिः | तिग्मरश्मि (१.१) | the sun |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | दी | रि | तां | ता | मि | ति | या | ज्ञ | से | न्या |
| न | वी | कृ | तो | द्ग्रा | हि | त | वि | प्र | का | राम् |
| आ | सा | द्य | वा | चं | स | भृ | शं | दि | दी | पे |
| का | ष्ठा | मु | दी | ची | मि | व | ति | ग्म | र | श्मिः |
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