करोति योऽशेषजनातिरिक्तां
सम्भावनामर्थवतीं क्रियाभिः ।
संसत्सु जाते पुरुषाधिकारे
न पूरणी तं समुपैति संख्या ॥
करोति योऽशेषजनातिरिक्तां
सम्भावनामर्थवतीं क्रियाभिः ।
संसत्सु जाते पुरुषाधिकारे
न पूरणी तं समुपैति संख्या ॥
सम्भावनामर्थवतीं क्रियाभिः ।
संसत्सु जाते पुरुषाधिकारे
न पूरणी तं समुपैति संख्या ॥
अन्वयः
AI
यः अशेषजन-अतिरिक्ताम् सम्भावनाम् क्रियाभिः अर्थवतीम् करोति, संसत्सु पुरुष-अधिकारे जाते (सति) पूरणी संख्या तम् न समुपैति ।
English Summary
AI
He who, through his actions, makes the high esteem placed in him—which surpasses that of all other people—fruitful, is not counted as a mere number to fill a quota when a matter concerning great men arises in assemblies.
सारांश
AI
जो व्यक्ति अपनी महान प्रतिष्ठा को अपने श्रेष्ठ कार्यों से सार्थक करता है, पुरुषों की सभा में उसकी गणना केवल संख्या पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि सर्वश्रेष्ठ के रूप में होती है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
करोतीति ॥ यः पुमानशेषजनादितरजनादतिरिक्तामधिकाम् । सर्वातिशायिनीमित्यर्थः । संभावनां योग्यतां क्रियाभिश्चरितैरर्थवतीं सफलां करोति । तं पुमांसं संसत्सु सभासु ।
सभासमितिसंसदः इत्यमरः (अमरकोशः २.७.१७ ) । पुरुषाधिकारे योग्यपुरुषगणनाप्रस्तावे जाते सति । पूर्यतेऽनयेति पूरणी संख्या द्वित्वादिसंख्या न समुपैति न गच्छति । अद्वितीयो भवतीत्यर्थः । तस्मादसाधारणलाभाय त्वयापि महानुत्साह आस्थेय इति भावः ॥ अथ द्वाभ्यां सुलभविपक्षस्य प्रोषितस्यार्जुनस्य कर्तव्यमुपदिशति
पदच्छेदः
AI
| करोति | करोति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | makes |
| यः | यद् (१.१) | he who |
| अशेषजनातिरिक्ताम् | अशेष–जन–अतिरिक्त (अति√रिच्+क्त, २.१) | surpassing all other people |
| सम्भावनाम् | सम्भावना (२.१) | high esteem |
| अर्थवतीम् | अर्थवत् (२.१) | fruitful |
| क्रियाभिः | क्रिया (३.३) | by actions |
| संसत्सु | संसद् (७.३) | in assemblies |
| जाते | जात (√जन्+क्त, ७.१) | when it has arisen |
| पुरुषाधिकारे | पुरुष–अधिकार (७.१) | a matter concerning great men |
| न | न | not |
| पूरणी | पूरणी (१.१) | a completing |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| समुपैति | समुपैति (सम्+उप√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | approaches |
| संख्या | संख्या (१.१) | number |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | रो | ति | यो | ऽशे | ष | ज | ना | ति | रि | क्तां |
| स | म्भा | व | ना | म | र्थ | व | तीं | क्रि | या | भिः |
| सं | स | त्सु | जा | ते | पु | रु | षा | धि | का | रे |
| न | पू | र | णी | तं | स | मु | पै | ति | सं | ख्या |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.